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shampa andaliib
aur manzar haseen karte ho
aur manzar haseen karte ho | और मंज़र हसीन करते हो
- shampa andaliib
और
मंज़र
हसीन
करते
हो
तुम
तो
बिल्कुल
चराग़
जैसे
हो
क्या
तुम्हें
ये
ख़बर
नहीं
है
कि
तुम
मेरे
दिल
के
क़रीब
रहते
हो
मैं
ने
बोला
था
अब
नहीं
रहना
और
तुम
फिर
उदास
बैठे
हो
मुझ
को
साहिल
पे
छोड़ने
वालों
ये
जो
दरिया
है
पार
कैसे
हो
अजनबी
शहर
है
यहाँ
हम
से
कौन
पूछेगा
आप
कैसे
हो
- shampa andaliib
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कुछ
नहीं
आज
तुझ
को
देने
को
सिर्फ़
सूखा
गुलाब
रक्खा
है
shampa andaliib
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ख़ुदारा
ना-ख़ुदा
कोई
न
आए
अगर
कश्ती
भँवर
की
सम्त
जाए
ज़माने
से
बहुत
जब
तंग
आए
ख़ुदास
राब्ते
अपने
बढ़ाए
गुज़िश्ता
साल
से
पहले
कभी
भी
मुझे
ये
रतजगे
इतने
न
भाए
बहुत
दिन
बाद
ये
जाना
कि
हम
पर
सितम
कुछ
आपने
भी
कम
न
ढाए
मुझे
तकलीफ़
दे
कर
या-इलाही
किसी
की
आँख
में
आँसू
न
आए
मेरी
आँखों
ने
देखे
ख़्वाब
कैसे
मुझे
क़िस्मत
ने
कैसे
दिन
दिखाए
मुझे
उड़ने
का
मौक़ा'
तब
मिला
था
मेरे
सय्याद
ने
जब
पर
जलाए
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shampa andaliib
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मुझ
को
चाबी
मिले
तो
हो
मालूम
क्या
छुपाया
गया
है
कमरे
में
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साथ
साया
तक
नहीं
है
हम
अकेले
रो
रहे
हैं
shampa andaliib
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तिरी
आँखों
के
अंदर
देखती
हैं
मिरी
आँखें
समुंदर
देखती
हैं
यही
आँखें
जहाँ
वालों
को
देखें
यही
आँखें
कलंदर
देखती
हैं
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shampa andaliib
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