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shampa andaliib
tiri aankhoñ ke andar dekhti hain
tiri aankhoñ ke andar dekhti hain | तिरी आँखों के अंदर देखती हैं
- shampa andaliib
तिरी
आँखों
के
अंदर
देखती
हैं
मिरी
आँखें
समुंदर
देखती
हैं
यही
आँखें
जहाँ
वालों
को
देखें
यही
आँखें
कलंदर
देखती
हैं
- shampa andaliib
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उदासी
इक
समुंदर
है
कि
जिसकी
तह
नहीं
है
मैं
नीचे
और
नीचे
और
नीचे
जा
रहा
हूँ
Charagh Sharma
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तिरे
एहसास
में
डूबा
हुआ
मैं
कभी
सहरा
कभी
दरिया
हुआ
मैं
Siraj Faisal Khan
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जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
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Dushyant Kumar
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हैरत
से
जो
यूँँ
मेरी
तरफ़
देख
रहे
हो
लगता
है
कभी
तुम
ने
समुंदर
नहीं
देखा
Aanis Moin
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चाँद
चेहरा
ज़ुल्फ़
दरिया
बात
ख़ुशबू
दिल
चमन
इक
तुम्हें
दे
कर
ख़ुदा
ने
दे
दिया
क्या
क्या
मुझे
Bashir Badr
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मुहब्बत
आपसे
करना
कभी
आसाँ
नहीं
था
पर
बिना
कश्ती
के
दरिया
पार
करना
शौक़
है
मेरा
Tanoj Dadhich
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चाँद
भी
हैरान
दरिया
भी
परेशानी
में
है
अक्स
किस
का
है
कि
इतनी
रौशनी
पानी
में
है
Farhat Ehsaas
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कोई
कहता
था
समुंदर
हूँ
मैं
और
मिरी
जेब
में
क़तरा
भी
नहीं
Kaifi Azmi
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आँसू
आँसू
जिस
ने
दरिया
पार
किए
क़तरा
क़तरा
आब
में
उलझा
बैठा
है
Mashkoor Husain Yaad
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बहरस
ख़ारिज
हूँ
ये
मालूम
है
पर
तुम्हारी
ही
ग़ज़ल
का
शे'र
हूँ
Gyan Prakash Akul
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रहनुमा
कोई
भी
नहीं
मेरा
अपने
रस्ते
पे
चल
रही
हूँ
मैं
shampa andaliib
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उस
से
बचते
फिरते
हो
तुम
जिस
का
सब
पर
साया
है
shampa andaliib
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बोझ
दुख
का
उठा
नहीं
पाया
दिल
बेचारा
निभा
नहीं
पाया
इतनी
क़ुव्वत
नहीं
मेरे
दिल
में
तेरे
दिल
को
दुखा
नहीं
पाया
मेरे
दिल
की
सुनो
कि
मेरा
दिल
एक
क़िस्सा
सुना
नहीं
पाया
और
उम्मीद
क्या
रखूँ
तुझ
से
एक
रिश्ता
निभा
नहीं
पाया
कट
गया
बंदगी
में
ये
जीवन
मैं
ने
फिर
भी
ख़ुदा
नहीं
पाया
तेरे
आने
की
थी
मुझे
उम्मीद
तू
भी
मुझ
को
भुला
नहीं
पाया
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shampa andaliib
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साँसें
दो
चार
रह
गईं
लेकिन
ख़त
तुम्हारा
अभी
नहीं
आया
shampa andaliib
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कुछ
नए
और
कुछ
पुराने
हो
गए
कहकहे
अब
दफ़्न
सारे
हो
गए
जाओ
देखो
काम
कोई
दूसरा
क्यूँँ
खड़े
सब
मेरे
आगे
हो
गए
फिर
से
खींचा
ध्यान
दुख
ने
और
हम
ग़म-ज़दा
फिर
बैठे
बैठे
हो
गए
किस
लिए
अब
सर
झुका
है
आपका
अब
तो
हम
भी
आप
जैसे
हो
गए
राह
से
मुझ
को
हटा
कर
अंदलीब
मुझ
से
आगे
आज
सारे
हो
गए
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shampa andaliib
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