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shampa andaliib
rehnuma koi bhi nahin meraa
rehnuma koi bhi nahin meraa | रहनुमा कोई भी नहीं मेरा
- shampa andaliib
रहनुमा
कोई
भी
नहीं
मेरा
अपने
रस्ते
पे
चल
रही
हूँ
मैं
- shampa andaliib
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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दिल
के
तमाम
ज़ख़्म
तेरी
हाँ
से
भर
गए
जितने
कठिन
थे
रास्ते
वो
सब
गुज़र
गए
Kumar Vishwas
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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काम
की
बात
मैंने
की
ही
नहीं
ये
मेरा
तौर-ए-ज़िंदगी
ही
नहीं
Jaun Elia
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चलते
हुए
मुझ
में
कहीं
ठहरा
हुआ
तू
है
रस्ता
नहीं
मंज़िल
नहीं
अच्छा
हुआ
तू
है
Abhishek shukla
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हमारे
लोग
अगर
रास्ता
न
पाएँगे
शिलाएँ
जोड़
के
पानी
पे
पुल
बनाएँगे
फिर
एक
बार
मनेगी
अवध
में
दीवाली
फिर
एक
बार
सभी
रौशनी
में
आएँगे
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Amit Jha Rahi
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कहाँ
आ
के
रुकने
थे
रास्ते
कहाँ
मोड़
था
उसे
भूल
जा
वो
जो
मिल
गया
उसे
याद
रख
जो
नहीं
मिला
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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उसूली
तौर
पे
मर
जाना
चाहिए
था
मगर
मुझे
सुकून
मिला
है
तुझे
जुदा
कर
के
Ali Zaryoun
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हमारी
आँखों
का
काजल
बहा
कर
जो
आया
वो
गया
दिल
को
दुखा
कर
हमारी
कौन
सुनता
चल
दिए
सब
हमें
तकलीफ़
फिर
अपनी
सुना
कर
वो
पंछी
फिर
दोबारा
उड़
न
पाए
किए
आज़ाद
जो
क़ैदी
बना
कर
ख़ुशी
बाँटो
ख़ुशी
से
और
सोचो
किसी
को
क्या
मिला
है
दिल
दुखा
कर
अगर
मुजरिम
हो
तो
फिर
जुर्म
अपना
करो
मंज़ूर
अब
सर
को
झुका
कर
हमारी
आँखें
तो
तकती
रहीं
पर
नहीं
देखा
किसी
ने
दूर
जा
कर
चलो
भरते
हैं
ख़ालीपन
ये
शम्पा
दर-ओ-दीवार
को
बातें
सुना
कर
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shampa andaliib
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सब
लोग
मेरे
अपने
मेरे
साथ
ही
तो
हैं
मुझ
को
इसी
फ़ितूर
ने
बर्बाद
कर
दिया
shampa andaliib
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तिरा
जाना
कहाँ
बर्दाश्त
होगा
गले
लग
जाएँगे
दीवार
से
हम
shampa andaliib
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तेरे
होने
से
खिल
उठा
जंगल
दुख
भरा
था
ये
ख़ुशनुमा
जंगल
कुछ
दिनों
के
लिए
नदी
सूखी
हो
गया
फिर
हरा
भरा
जंगल
दो
घड़ी
को
तेरी
नज़र
झपकी
खो
गया
कोई!
सो
गया
जंगल
शहरस
गाँव
की
तरफ़
आई
मेरे
दुख
की
दवा
बना
जंगल
तेरे
जाने
पे
रो
दिए
पंछी
मेरी
आँखों
में
बस
गया
जंगल
अपने
हाथों
से
सींच
कुछ
पौधे
ख़ूब-सूरत
नया
बना
जंगल
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shampa andaliib
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मुझे
इल्हाम
होता
था
कि
इक
दिन
सहारा
शा'इरी
मेरा
बनेगी
shampa andaliib
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