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shampa andaliib
hamaari aankhoñ ka kaajal baha kar
hamaari aankhoñ ka kaajal baha kar | हमारी आँखों का काजल बहा कर
- shampa andaliib
हमारी
आँखों
का
काजल
बहा
कर
जो
आया
वो
गया
दिल
को
दुखा
कर
हमारी
कौन
सुनता
चल
दिए
सब
हमें
तकलीफ़
फिर
अपनी
सुना
कर
वो
पंछी
फिर
दोबारा
उड़
न
पाए
किए
आज़ाद
जो
क़ैदी
बना
कर
ख़ुशी
बाँटो
ख़ुशी
से
और
सोचो
किसी
को
क्या
मिला
है
दिल
दुखा
कर
अगर
मुजरिम
हो
तो
फिर
जुर्म
अपना
करो
मंज़ूर
अब
सर
को
झुका
कर
हमारी
आँखें
तो
तकती
रहीं
पर
नहीं
देखा
किसी
ने
दूर
जा
कर
चलो
भरते
हैं
ख़ालीपन
ये
शम्पा
दर-ओ-दीवार
को
बातें
सुना
कर
- shampa andaliib
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इतना
भी
अब
हम
को
पागल
मत
समझो
थोड़ी
बहुत
तो
दुनिया
हम
ने
देखी
है
shampa andaliib
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हमारा
दिल
तो
खंडर
बन
चुका
है
यहाँ
सब
टूट
कर
बिखरा
पड़ा
है
मिरी
आँखों
में
अब
तक
ताज़गी
है
कोई
चेहरा
मिरे
दिल
में
बसा
है
न
जाने
क्यूँँ
उधर
हम
चल
रहे
हैं
अमूमन
जिस
तरफ़
जाना
मना
है
जहाँ
तक
चल
सको
चलते
रहो
बस
मोहब्बत
एक
लम्बा
रास्ता
है
अभी
और
रौशनी
करनी
पड़ेगी
अभी
हम
को
बहुत
कुछ
देखना
है
भँवर
की
सम्त
कश्ती
जा
रही
है
मगर
बे-फ़िक्र
फिर
भी
ना-ख़ुदा
है
अभी
तक
डॉक्टर
आया
नहीं
और
मरज़
दिन-रात
बढ़ता
जा
रहा
है
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shampa andaliib
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जो
शख़्स
मेहरबान
निगहबान
था
कभी
बे-साख़्ता
वो
दूर
बहुत
दूर
हो
गया
shampa andaliib
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बेजा
है
मुझ
को
अब
ये
ज़माने
की
रौनक़ें
दिल
को
सुकून
मिल
रहा
बस
देख
कर
तुझे
shampa andaliib
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अपने
अंदर
निहार
कर
देखा
दूर
तक
रौशनी
नज़र
आई
shampa andaliib
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