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shampa andaliib
apne vaade ki aabroo rakkhi
apne vaade ki aabroo rakkhi | अपने वादे की आबरू रक्खी
- shampa andaliib
अपने
वादे
की
आबरू
रक्खी
तुझपे
फिर
से
तरस
नहीं
खाया
- shampa andaliib
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ऐ
"दाग़"
बुरा
मान
ना
तू
उसके
कहे
का
माशूक
की
गाली
से
तो
इज़्ज़त
नहीं
जाती
Dagh Dehlvi
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लड़
सको
दुनिया
से
जज़्बों
में
वो
शिद्दत
चाहिए
इश्क़
करने
के
लिए
इतनी
तो
हिम्मत
चाहिए
कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
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Nadeem Shaad
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चुप-चाप
अपनी
आग
में
जलते
रहो
'फ़राज़'
दुनिया
तो
अर्ज़-ए-हाल
से
बे-आबरू
करे
Ahmad Faraz
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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सुन
ओ
कहानीकार
कोई
ऐसा
रोल
दे
ऐसे
अदा
करूँं
मेरी
इज़्ज़त
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
Nadeem Shaad
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ज़ख़्म
की
इज़्ज़त
करते
हैं
देर
से
पट्टी
खोलेंगे
चेहरा
पढ़ने
वाले
चोर
गठरी
थोड़ी
खोलेंगे
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Khurram Afaq
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चादर
की
इज़्ज़त
करता
हूँ
और
पर्दे
को
मानता
हूँ
हर
पर्दा
पर्दा
नइँ
होता
इतना
मैं
भी
जानता
हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें
लगा
है
कि
मेरे
होते,
तुम्हें
भी
दिल
में
जगह
मिलेगी
बड़ी
ही
इज़्ज़त
से
कह
रहा
हूँ
,चलो
उठो
अब
मेरी
जगह
से
Shadab Asghar
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अल्लाह
तेरे
हाथ
है
अब
आबरू-ए-शौक़
दम
घुट
रहा
है
वक़्त
की
रफ़्तार
देख
कर
Bismil Azimabadi
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लाख
कोशिश
करी
हकीमों
ने
जुड़
न
पाया
ये
मेरा
टूटा
दिल
shampa andaliib
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एक
तावीज़
की
ज़रूरत
है
लग
गई
फिर
बुरी
नज़र
मुझ
को
shampa andaliib
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मुझ
को
रोने
का
दे
दिया
किरदार
मेरी
आदत
थी
मुस्कुराने
की
shampa andaliib
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ख़ुद
पे
रोते
हैं
प्यार
आता
है
काम
कब
ग़म-गुसार
आता
है
इस
क़दर
तू
अजीज़
है
मुझ
को
तेरे
ग़ुस्से
पे
प्यार
आता
है
ये
जो
दरिया
है
मेरी
आँखों
में
तू
नज़र
इस
के
पार
आता
है
सब
सही
एक
दम
नहीं
होता
आते
आते
सुधार
आता
है
कोई
उस
पार
से
नहीं
आता
बारहा
दिल
पुकार
आता
है
घर
किसी
का
भी
ख़ाक
होता
हो
सब
की
जानिब
ग़ुबार
आता
है
आसमाँ
से
हो
ज़ोर
की
बारिश
फ़स्ल
पर
तब
निखार
आता
है
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shampa andaliib
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तिरा
जाना
कहाँ
बर्दाश्त
होगा
गले
लग
जाएँगे
दीवार
से
हम
shampa andaliib
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