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shampa andaliib
mujh ko rone ka de diya kirdaar
mujh ko rone ka de diya kirdaar | मुझ को रोने का दे दिया किरदार
- shampa andaliib
मुझ
को
रोने
का
दे
दिया
किरदार
मेरी
आदत
थी
मुस्कुराने
की
- shampa andaliib
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ख़बर
मिली
है
स्टेशन
पर
तुम
भी
आने
वाली
हो
रेल
को
पीछे
छोड़
दीया
है
साँसों
की
रफ़्तारों
ने
Shadab Javed
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उस
से
कहना
की
धुआँ
देखने
लाएक़
होगा
आग
पहने
हुए
मैं
जाऊँगा
पानी
की
तरफ़
Abhishek shukla
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बिठा
दिया
है
सिपाही
के
दिल
में
डर
उसने
तलाशी
दी
है
दुपट्टा
उतार
कर
उसने
मैं
इसलिए
भी
उसे
ख़ुद-कुशी
से
रोकता
हूँ
लिखा
हुआ
है
मेरा
नाम
जिस्म
पर
उसने
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Zia Mazkoor
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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जो
यहाँ
ख़ुद
ही
लगा
रक्खी
है
चारों
जानिब
एक
दिन
हम
ने
इसी
आग
में
जल
जाना
है
Zafar Iqbal
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एक
परिन्दे
का
घर
उजाड़
दिया
किसी
ने
बस
बच्चों
के
इक
दिन
के
झूले
की
ख़ातिर
Pankaj murenvi
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ज़िन्दगी
छीन
ले
बख़्शी
हुई
दौलत
अपनी
तूने
ख़्वाबों
के
सिवा
मुझ
को
दिया
भी
क्या
है
Akhtar Saeed Khan
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जबसे
आप
गए
हो
मेरे
जीवन
से
गाने
सुनता
हूँ,
पर
गाना
छोड़
दिया
Tanoj Dadhich
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बैठे
बैठे
फेंक
दिया
है
आतिश-दान
में
क्या
क्या
कुछ
मौसम
इतना
सर्द
नहीं
था
जितनी
आग
जला
ली
है
Zulfiqar aadil
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ये
सच
है
नफ़रतों
की
आग
ने
सब
कुछ
जला
डाला
मगर
उम्मीद
की
ठण्डी
हवाएँ
रोज़
आती
हैं
Munawwar Rana
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अपनी
आँखों
पे
बाँध
कर
पट्टी
तेरी
गलियों
में
रक़्स
करती
हूँ
shampa andaliib
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और
किसी
शख़्स
शै
में
न
अब
दिल
रहा
आप
को
देख
कर
बस
सुकूँ
मिल
रहा
आज
वक़्त-ए-ख़िज़ाँ
याँ
से
रुख़सत
हुआ
दिल
के
गुलशन
में
इक
गुल
नया
खिल
रहा
दिल
पे
अपना
कभी
बस
चला
ही
नहीं
कोई
मेरे
सिवा
याँ
पे
दाख़िल
रहा
नींद
में
खो
गए
आज
की
रात
हम
कोई
ख़्वाब-ओ-ख़्यालों
में
शामिल
रहा
मुस्कुराते
रहे
वक़्त
के
साथ
साथ
अपने
जीवन
का
बस
ये
ही
हासिल
रहा
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shampa andaliib
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बहुत
से
ख़ास
रिश्तों
में
दरारें
पड़
चुकी
हैं
अब
हमारी
सादगी
दुश्मन
हमारी
बन
गई
यारों
shampa andaliib
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नाकाम
कोशिशों
से
परेशाँ
थे
चारा-गर
तूने
जबीं
को
चूम
के
सब
ज़ख़्म
भर
दिए
shampa andaliib
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तूफ़ाँ
से
जूझते
हुए
वहशत
में
आ
गए
फिर
यूँँ
जले
चराग़
कि
बस
आग
लग
गई
shampa andaliib
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