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shampa andaliib
naakaam koshishon se pareshaan the chaaragar
naakaam koshishon se pareshaan the chaaragar | नाकाम कोशिशों से परेशाँ थे चारा-गर
- shampa andaliib
नाकाम
कोशिशों
से
परेशाँ
थे
चारा-गर
तूने
जबीं
को
चूम
के
सब
ज़ख़्म
भर
दिए
- shampa andaliib
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दर्द
मारे
है
ऐसे
कश
पे
कश
ज़िस्म
जलता
सिगार
हो
जैसे
Ajeetendra Aazi Tamaam
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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दर्द
में
शिद्दत-ए-एहसास
नहीं
थी
पहले
ज़िंदगी
राम
का
बन-बास
नहीं
थी
पहले
Shakeel Azmi
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हमारे
सैकड़ों
दुख
थे,
और
उस
में
एक
दुख
ये
भी
जो
हम
से
हो
के
गुज़रे
थे,
हमें
दीवार
कहते
थे
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Siddharth Saaz
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तुम्हारी
याद
के
जब
ज़ख़्म
भरने
लगते
हैं
किसी
बहाने
तुम्हें
याद
करने
लगते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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जो
कहता
है
वैसे
करना
पड़ता
है
इतना
प्यारा
है
कि
डरना
पड़ता
है
आँखें
काली
कर
देता
है
उसका
दुख
सबको
ये
जुर्माना
भरना
पड़ता
है
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Kafeel Rana
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ये
मयख़ाने
में
बैठ
अफ़सोस
अब
क्यूँ
तेरे
हिस्से
भी
तो
जवानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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हर
एक
सितम
पे
दाद
दी
हर
ज़ख़्म
पे
दु'आ
हमने
भी
दुश्मनों
को
सताया
बहुत
दिनों
Nawaz Deobandi
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पास
जब
तक
वो
रहे
दर्द
थमा
रहता
है
फैलता
जाता
है
फिर
आँख
के
काजल
की
तरह
Parveen Shakir
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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सब
साफ़
दिख
रहा
है
मुझे
दूर
तक
अभी
चेहरे
पे
तेरे
नाम
की
हल्की
सी
धूप
है
shampa andaliib
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क़ासिद
तुम्हारे
हाथ
में
ये
ख़त
नहीं
फ़क़त
इस
में
हमारी
रूह
भी
पैवस्त
हो
गई
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shampa andaliib
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बोझ
दुख
का
उठा
नहीं
पाया
दिल
बेचारा
निभा
नहीं
पाया
इतनी
क़ुव्वत
नहीं
मेरे
दिल
में
तेरे
दिल
को
दुखा
नहीं
पाया
मेरे
दिल
की
सुनो
कि
मेरा
दिल
एक
क़िस्सा
सुना
नहीं
पाया
और
उम्मीद
क्या
रखूँ
तुझ
से
एक
रिश्ता
निभा
नहीं
पाया
कट
गया
बंदगी
में
ये
जीवन
मैं
ने
फिर
भी
ख़ुदा
नहीं
पाया
तेरे
आने
की
थी
मुझे
उम्मीद
तू
भी
मुझ
को
भुला
नहीं
पाया
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shampa andaliib
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ख़ुद
पे
रोते
हैं
प्यार
आता
है
काम
कब
ग़म-गुसार
आता
है
इस
क़दर
तू
अजीज़
है
मुझ
को
तेरे
ग़ुस्से
पे
प्यार
आता
है
ये
जो
दरिया
है
मेरी
आँखों
में
तू
नज़र
इस
के
पार
आता
है
सब
सही
एक
दम
नहीं
होता
आते
आते
सुधार
आता
है
कोई
उस
पार
से
नहीं
आता
बारहा
दिल
पुकार
आता
है
घर
किसी
का
भी
ख़ाक
होता
हो
सब
की
जानिब
ग़ुबार
आता
है
आसमाँ
से
हो
ज़ोर
की
बारिश
फ़स्ल
पर
तब
निखार
आता
है
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shampa andaliib
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इतना
भी
अब
हम
को
पागल
मत
समझो
थोड़ी
बहुत
तो
दुनिया
हम
ने
देखी
है
shampa andaliib
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