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shampa andaliib
apni aankhoñ pe baandh kar patti
apni aankhoñ pe baandh kar patti | अपनी आँखों पे बाँध कर पट्टी
- shampa andaliib
अपनी
आँखों
पे
बाँध
कर
पट्टी
तेरी
गलियों
में
रक़्स
करती
हूँ
- shampa andaliib
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महफ़िल
में
तेरी
यूँँ
ही
रहे
जश्न-ए-चरागाँ
आँखों
में
ही
ये
रात
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
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फिर
इस
के
बाद
मनाया
न
जश्न
ख़ुश्बू
का
लहू
में
डूबी
थी
फ़स्ल-ए-बहार
क्या
करते
Azhar Iqbal
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है
ख़ुशी
इंतिज़ार
की
हर
दम
मैं
ये
क्यूँँ
पूछूँ
कब
मिलेंगे
आप
Nizam Rampuri
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सियासत
के
चेहरे
पे
रौनक़
नहीं
ये
औरत
हमेशा
की
बीमार
है
Shakeel Jamali
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हर
ख़ुशी
मुस्कुरा
के
कहती
है
दर्द
बनकर
छुपे
हुए
हो
तुम
आज
आब-ओ-हवा
में
ख़ुश्बू
है
लग
रहा
है
घुले
हुए
हो
तुम
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Ritesh Rajwada
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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नए
दीवानों
को
देखें
तो
ख़ुशी
होती
है
हम
भी
ऐसे
ही
थे
जब
आए
थे
वीराने
में
Ahmad Mushtaq
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क़ुबूल
है
जिन्हें
ग़म
भी
तेरी
ख़ुशी
के
लिए
वो
जी
रहे
हैं
हक़ीक़त
में
ज़िन्दगी
के
लिए
Nasir Kazmi
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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ख़ुदा
का
शुक्र
अदा
कर
वो
बे-वफ़ा
निकला
ख़ुशी
मना
कि
तिरी
जान
की
बहाली
हुई
Shakeel Jamali
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पहले
सब
को
सलाम
करते
हैं
फिर
कहीं
पर
क़याम
करते
हैं
कार-ए-दुनिया
से
मिलते
ही
फ़ुर्सत
अपने
हिस्से
का
काम
करते
हैं
आपकी
आँखें
हुक्म
देती
हैं
आप
सीधे
ग़ुलाम
करते
हैं
हम
भी
सब
के
क़रीब
जाते
नहीं
दूर
से
राम
राम
करते
हैं
एक
पर
कैसे
वो
रहें
मौक़ूफ़
जो
सभी
से
कलाम
करते
हैं
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shampa andaliib
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देखती
हूँ
कि
कौन
देखेगा
तुम
पे
नज़रें
जमाए
बैठी
हूँ
shampa andaliib
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किसी
से
अब
कोई
शिकवा
नहीं
है
हमारा
वक़्त
ही
अच्छा
नहीं
है
फ़लक
पर
धुंध
ही
है
या
हमीं
ने
अभी
तक
ग़ौर
से
देखा
नहीं
है
हमारी
ज़िंदगी
रफ़्तार
में
है
हमारे
पास
कुछ
रुकता
नहीं
है
ये
सूनी
खिड़कियाँ
अब
बोलती
हैं
कोई
परदेस
से
लौटा
नहीं
है
कई
सदमों
से
वाक़िफ़
हो
चुका
है
ग़नीमत
है
कि
दिल
बैठा
नहीं
है
ख़ुशी
की
बात
है
ख़ुश
हैं
हमारे
ख़ुशी
की
बात
पर
रोना
नहीं
है
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shampa andaliib
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कशिश
है
आपके
चेहरे
में
ऐसी
फ़लक
से
चाँद
तारे
आ
गए
हैं
shampa andaliib
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ख़ुद
पे
रोते
हैं
प्यार
आता
है
काम
कब
ग़म-गुसार
आता
है
इस
क़दर
तू
अजीज़
है
मुझ
को
तेरे
ग़ुस्से
पे
प्यार
आता
है
ये
जो
दरिया
है
मेरी
आँखों
में
तू
नज़र
इस
के
पार
आता
है
सब
सही
एक
दम
नहीं
होता
आते
आते
सुधार
आता
है
कोई
उस
पार
से
नहीं
आता
बारहा
दिल
पुकार
आता
है
घर
किसी
का
भी
ख़ाक
होता
हो
सब
की
जानिब
ग़ुबार
आता
है
आसमाँ
से
हो
ज़ोर
की
बारिश
फ़स्ल
पर
तब
निखार
आता
है
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shampa andaliib
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