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shampa andaliib
dekhti hooñ ki kaun dekhega
dekhti hooñ ki kaun dekhega | देखती हूँ कि कौन देखेगा
- shampa andaliib
देखती
हूँ
कि
कौन
देखेगा
तुम
पे
नज़रें
जमाए
बैठी
हूँ
- shampa andaliib
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देखिए
ग़म-गुसार
कैसे
हैं
हाथ
पर
हाथ
रख
के
बैठे
हैं
वार
तो
सिर्फ़
एक
होता
है
दिल
के
टुकड़े
हज़ार
होते
हैं
सारी
दुनिया
समाई
है
मुझ
में
सारे
रस्ते
मुझी
से
गुज़रे
हैं
उन
में
तूफ़ान
थे
कई
शामिल
हमने
सोचा
हवा
के
झोके
हैं
तेरे
दीदार
की
उमीद
में
हम
तेरे
दर
पर
उदास
बैठे
हैं
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shampa andaliib
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निगाह-ए-यार
के
जलवे
न
पूछो
बदन
पर
चाँद
तारे
जड़
गए
हैं
shampa andaliib
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तुझ
से
पहले
जो
शख़्स
आया
था
मेरे
दिल
में
नहीं
समाया
था
कुछ
तो
क़िस्मत
ख़राब
थी
मेरी
रंग
तू
ने
भी
कुछ
दिखाया
था
कितनी
बातें
बनाई
दुनिया
ने
एक
क़िस्सा
फ़क़त
सुनाया
था
सब
नज़र
आए
हादसे
के
बाद
वक़्त
पर
कोई
भी
न
आया
था
ये
अलग
बात
खुल
गईं
आँखें
ख़्वाब
हम
ने
भी
इक
सजाया
था
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shampa andaliib
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मोहब्बत
है
मुझे
तुझ
से
मोहब्बत
तू
मेरे
काम
का
ज़रिया
नहीं
ह
shampa andaliib
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हम
को
दोषी
ठहराते
हैं
ख़ुद
ही
लोग
बदल
जाते
हैं
अपनों
की
बातें
सुन
कर
हम
अब
मन
ही
मन
घबराते
हैं
उन
को
कोई
दुख
नइँ
होता
जो
अपना
रोना
गाते
हैं
रोज़
दु'आ
में
रब
से
बोलूँ
जाने
वाले
कब
आते
हैं
छोड़
के
दुनिया-दारी
मुझ
को
अब
चंदा
तारे
भाते
हैं
पागल
क़ासिद
लौटा
कर
अब
मेरी
चिट्ठी
ले
आते
हैं
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shampa andaliib
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