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shampa andaliib
nigah-e-yaar ke jalwe na poochho
nigah-e-yaar ke jalwe na poochho | निगाह-ए-यार के जलवे न पूछो
- shampa andaliib
निगाह-ए-यार
के
जलवे
न
पूछो
बदन
पर
चाँद
तारे
जड़
गए
हैं
- shampa andaliib
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यूँँ
तो
तेरे
सँवरने
पर
कोई
बंदिश
नहीं
है
जाँ
मगर
उस
चाँद
की
तौहीन
करना
ठीक
थोड़ी
है
Harsh saxena
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चंद
उम्मीदें
निचोड़ी
थीं
तो
आहें
टपकीं
दिल
को
पिघलाएँ
तो
हो
सकता
है
साँसें
निकलें
Gulzar
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रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
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चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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जो
कल
शब
से
तन्हा
था
कैसा
होगा
वो
निस्फ़
चाँद
अब
जाने
किस
का
होगा
ALI ZUHRI
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तुमको
हम
ही
झूठ
लगेंगे
लेकिन
दरिया
झूठा
है
पहले
हमको
चाँद
मिला
था
फिर
दरिया
को
चाँद
मिला
Abhishar Geeta Shukla
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तरीक़े
और
भी
हैं
इस
तरह
परखा
नहीं
जाता
चराग़ों
को
हवा
के
सामने
रक्खा
नहीं
जाता
मोहब्बत
फ़ैसला
करती
है
पहले
चंद
लम्हों
में
जहाँ
पर
इश्क़
होता
है
वहाँ
सोचा
नहीं
जाता
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Abrar Kashif
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यूँँ
न
कर
वस्ल
के
लम्हों
को
हवस
से
ता'बीर
चंद
पत्ते
ही
तो
तोड़े
हैं
शजर
से
मैं
ने
Khurram Afaq
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यही
है
ज़िंदगी
कुछ
ख़्वाब
चंद
उम्मीदें
इन्हीं
खिलौनों
से
तुम
भी
बहल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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छत
पे
सिगरेट
ले
के
बैठा
है
चाँद
भी
बेक़रार
है
शायद
Satya Prakash Soni
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जो
शख़्स
मेहरबान
निगहबान
था
कभी
बे-साख़्ता
वो
दूर
बहुत
दूर
हो
गया
shampa andaliib
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तिरी
आँखों
के
अंदर
देखती
हैं
मिरी
आँखें
समुंदर
देखती
हैं
यही
आँखें
जहाँ
वालों
को
देखें
यही
आँखें
कलंदर
देखती
हैं
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shampa andaliib
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लोग
तो
ख़ूब
हैं
इस
दुनिया
में
अच्छे
लेकिन
राज़दाँ
एक
हुआ
करता
है
दुनिया
भर
में
shampa andaliib
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मैंने
हारी
है
इश्क़
की
बाज़ी
क्या
मुझे
अब
भी
मौत
आएगी?
shampa andaliib
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बुरी
बातों
को
दिल
पर
मत
लगाओ
जहाँ
तक
हो
सके
बस
मुस्कुराओ
उसी
पर
ग़ौर
करना
जो
है
बस
में
नहीं
पा
सकते
जो
शय
भूल
जाओ
मिरे
अंदर
से
इक
आवाज़
आए
कभी
अपनी
तरफ़
भी
लौट
आओ
मैं
अपने
हाथों
से
घर
को
सजा
दूँ
तुम
अपने
हाथ
से
दीपक
जलाओ
अभी
दिल
को
तसल्ली
मिल
न
पाई
ज़रा
सा
मुस्कुराकर
फिर
दिखाओ
बढ़ाओ
बाम-ओ-दर
की
ऐसे
रौनक़
दर-ओ-दीवार
को
जन्नत
बनाओ
जो
पंछी
जा
चुके
हैं
दूर
हैं
वो
जो
पंछी
जा
रहे
उन
को
बुलाओ
तुम्हें
सब
कुछ
अता
रब
ने
किया
है
बनाना
चाहते
जो
कुछ
बनाओ
बदन
का
ख़ून
तक
हो
जाए
शामिल
ग़ज़ल
के
हुस्न
को
इतना
बढ़ाओ
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shampa andaliib
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