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shampa andaliib
maine haari hai ishq ki baazi
maine haari hai ishq ki baazi | मैंने हारी है इश्क़ की बाज़ी
- shampa andaliib
मैंने
हारी
है
इश्क़
की
बाज़ी
क्या
मुझे
अब
भी
मौत
आएगी?
- shampa andaliib
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मोहब्बत
का
सुबूत
अब
और
क्या
दें
तुम्हारी
माँ
को
माँ
कहने
लगे
हैं
Shadab Asghar
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अवल्ली
इश्क़
के
एहसास
भी
तारी
रक्खे
और
इस
बीच
नए
काम
भी
जारी
रक्खे
मैंने
दिल
रख
लिया
है
ये
भी
कोई
कम
तो
नहीं
दूसरा
ढूँढ़
लो
जो
बात
तुम्हारी
रक्खे
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Ashu Mishra
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कितना
झूठा
था
अपना
सच्चा
इश्क़
हिज्र
से
दोनों
ज़िंदा
बच
निकले
Prit
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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ऐ
इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
हाँ
इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
आज
एक
सितमगर
को
हँस
हँस
के
रुलाना
है
Jigar Moradabadi
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कुछ
इस
लिए
भी
तेरी
आरज़ू
नहीं
है
मुझे
मैं
चाहता
हूँ
मेरा
इश्क़
जावेदानी
हो
Vipul Kumar
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इश्क़
हमारा
चाँद
सितारे
छू
लेगा
घुटनों
पर
आकर
इज़हार
किया
हमने
Darpan
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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हुआ
जो
इश्क़
तो
वो
रोज़
ओ
शब
को
भूल
गए
वो
अपने
इश्क़
ए
नुमाइश
में
सब
को
भूल
गए
कहाँ
वो
दुनिया
में
आए
थे
बंदगी
के
लिए
मिला
सुकून
जहाँ
में
तो
रब
को
भूल
गए
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Hameed Sarwar Bahraichi
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देख
मोहब्बत
का
दस्तूर
तू
मुझ
से
मैं
तुझ
से
दूर
कोशिश
लाज़िम
है
प्यारे
आगे
जो
उसको
मंज़ूर
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Nasir Kazmi
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कोई
वा'दा
नहीं
निभाती
है
ज़िंदगी
फ़ायदा
उठाती
है
अब
फ़लक
पर
कोई
नहीं
रहता
मेरी
आवाज़
लौट
आती
है
इक
सुहागन
को
देख
कर
बेवा
बारहा
चूड़ियाँ
बजाती
है
तुम
भी
आ
कर
जताओ
मेरे
हो
याद
तो
रात
दिन
ही
आती
है
गुनगुनी
धूप
में
तुम्हारी
याद
कुछ
घड़ी
रूह
सेंक
जाती
है
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shampa andaliib
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तीरगी
में
कुछ
नहीं
बस
तीरगी
है
घर
के
बाहर
देख
कितनी
रौशनी
है
एक
जैसे
सुख
हैं
सब
के
और
दुख
भी
जो
तुम्हारी
वो
हमारी
ज़िंदगी
है
एक
वो
है
एक
वो
है
एक
वो
उफ़
और
किस
किस
से
तुम्हारी
दोस्ती
है
ये
अगर
मैं
भी
नहीं
तो
कौन
है
फिर
आइने
में
कौन
मुझ
पर
हँस
रही
है
सीधी
सादी
बात
है
गर
कोई
समझे
दोस्त
दुश्मन
आदमी
का
आदमी
है
पहले
जैसा
कुछ
नहीं
इस
दौर
में
अब
हर
किसी
को
हर
कोई
अब
अजनबी
है
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shampa andaliib
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देखती
हूँ
कि
कौन
देखेगा
तुम
पे
नज़रें
जमाए
बैठी
हूँ
shampa andaliib
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इक
पुरानी
याद
की
खिड़की
से
मैं
ने
कर
लिया
है
एक
चिट्ठी
कुछ
गुलाबों
कुछ
किताबों
का
नज़ारा
shampa andaliib
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कुछ
तो
दुख
से
नजात
मिल
जाए
जब
तलक
आप
पास
बैठे
हैं
shampa andaliib
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