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Abhishek shukla
main apne chaaron taraf hooñ aur is tarah ka hujoom
main apne chaaron taraf hooñ aur is tarah ka hujoom | मैं अपने चारों तरफ़ हूँ और इस तरह का हुजूम
- Abhishek shukla
मैं
अपने
चारों
तरफ़
हूँ
और
इस
तरह
का
हुजूम
अजीब
किस्म
की
तन्हाई
साथ
लाता
है
- Abhishek shukla
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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यदि
अंधकार
से
लड़ने
का
संकल्प
कोई
कर
लेता
है
तो
एक
अकेला
जुगनू
भी
सब
अन्धकार
हर
लेता
है
Balkavi Bairagi
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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देखो
ऐसे
क़रीब
आने
की
आस
मत
लगाओ
तुम
तन्हाई
से
रब्त
बढ़ाओ
फिर
मेरे
पास
आओ
तुम
Rohit tewatia 'Ishq'
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तन्हाई
के
हुजूम
में
वो
एक
तेरी
याद
जैसे
अँधेरी
रात
में
जलता
हुआ
दिया
Sagheer Lucky
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ख़ुद
चले
आओ
या
बुला
भेजो
रात
अकेले
बसर
नहीं
होती
Aziz Lakhnavi
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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अधूरे
शे'र
के
मिसरों
को
देखा
तो
किसे
कहते
हैं
तन्हाई
समझ
आई
Sunny Seher
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चाँद
सा
मिस्रा
अकेला
है
मिरे
काग़ज़
पर
छत
पे
आ
जाओ
मिरा
शे'र
मुकम्मल
कर
दो
Bashir Badr
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मैं
तो
ग़ज़ल
सुना
के
अकेला
खड़ा
रहा
सब
अपने
अपने
चाहने
वालों
में
खो
गए
Krishna Bihari Noor
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किसी
से
झूठी
मुहब्बत
किसी
से
सच्चा
बैर
मैं
कर
तो
सकता
हूँ
ये
सब
मगर
नहीं
करूँँगा
Abhishek shukla
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ये
इत्तिफ़ाक़
ज़रूरी
नहीं
दोबारा
हो
मैं
तुम
को
सोचने
बैठूँ
तो
ज़ख़्म
भर
जाएँ
Abhishek shukla
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लहर
का
ख़्वाब
हो
के
देखते
हैं
चल
तह-ए-अब
हो
के
देखते
हैं
उस
पे
इतना
यक़ीन
है
हम
को
उस
को
बेताब
हो
के
देखते
हैं
रात
को
रात
हो
के
जाना
था
ख़्वाब
को
ख़्वाब
हो
के
देखते
हैं
अपनी
अरज़ानियों
के
सदक़े
हम
ख़ुद
को
नायाब
हो
के
देखते
हैं
साहिलों
की
नज़र
में
आना
है
फिर
तो
ग़र्क़ाब
हो
के
देखते
हैं
वो
जो
पायाब
कह
रहा
था
हमें
उस
को
सैलाब
हो
के
देखते
हैं
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Abhishek shukla
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आबरू-ए-शब-ए-तीरा
नहीं
रखने
वाले
हम
कहीं
पर
भी
अँधेरा
नहीं
रखने
वाले
आइना
रखने
का
इल्ज़ाम
भी
आया
हम
पर
जब
कि
हम
लोग
तो
चेहरा
नहीं
रखने
वाले
हम
पे
फ़रहाद
का
कुछ
क़र्ज़
निकलता
है
सो
हम
तुम
कहो
भी
तो
ये
तेशा
नहीं
रखने
वाले
हम
को
मालूम
हैं
अज़-रु-ए-मोहब्बत
सो
हम
कोई
भी
दर्द
ज़ियादा
नहीं
रखने
वाले
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Abhishek shukla
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पा
ए
उम्मीद
प
रक्खे
हुए
सर
हैं
हम
लोग
हैं
न
होने
के
बराबर
ही
मगर
हैं
हम
लोग
तू
ने
बरता
ही
नहीं
ठीक
से
हम
को
ऐ
दोस्त
ऐब
लगते
हैं
ब-ज़ाहिर
प
हुनर
हैं
हम
लोग
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Abhishek shukla
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