hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Aziz Lakhnavi
KHud chale aao ya bula bhejo
KHud chale aao ya bula bhejo | ख़ुद चले आओ या बुला भेजो
- Aziz Lakhnavi
ख़ुद
चले
आओ
या
बुला
भेजो
रात
अकेले
बसर
नहीं
होती
- Aziz Lakhnavi
Download Sher Image
मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
Send
Download Image
67 Likes
तसव्वुर
तजरबा
तेवर
तमन्ना
और
तन्हाई
मिलेंगे
फूल
सब
इस
में
ग़ज़ल
गुलदान
है
यारों
पढ़ाई
नौकरी
शादी
फिर
उसके
बाद
दो
बच्चे
हमारी
ज़िन्दगी
इतनी
कहाँ
आसान
है
यारों
Read Full
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
41 Likes
तन्हाई
के
हुजूम
में
वो
एक
तेरी
याद
जैसे
अँधेरी
रात
में
जलता
हुआ
दिया
Sagheer Lucky
Send
Download Image
3 Likes
एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
Send
Download Image
31 Likes
दरिया
की
वुसअतों
से
उसे
नापते
नहीं
तन्हाई
कितनी
गहरी
है
इक
जाम
भर
के
देख
Adil Mansuri
Send
Download Image
28 Likes
एक
अरसे
तक
अकेले
हम
चले
फिर
हमारा
नाम
चलने
लग
गया
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
25 Likes
घर
लौट
के
रोएँगे
माँ
बाप
अकेले
में
मिट्टी
के
खिलौने
भी
सस्ते
न
थे
मेले
में
Qaisar-ul-Jafri
Send
Download Image
40 Likes
ऐब
हज़ारों
दिखते
हैं
मुझको
मेरी
परछाई
में
यानी
शीशे
से
मिलता
हूँ
अक्सर
मैं
तन्हाई
में
Ravi 'VEER'
Send
Download Image
3 Likes
कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
Read Full
Kazim Rizvi
Send
Download Image
6 Likes
यदि
अंधकार
से
लड़ने
का
संकल्प
कोई
कर
लेता
है
तो
एक
अकेला
जुगनू
भी
सब
अन्धकार
हर
लेता
है
Balkavi Bairagi
Send
Download Image
30 Likes
Read More
हिज्र
की
रात
याद
आती
है
फिर
वही
बात
याद
आती
है
तुम
ने
छेड़ा
तो
कुछ
खुले
हम
भी
बात
पर
बात
याद
आती
है
तुम
थे
और
हम
थे
चाँद
निकला
था
हाए
वो
रात
याद
आती
है
सुब्ह
के
वक़्त
ज़र्रे
ज़र्रे
की
वो
मुनाजात
याद
आती
है
हाए
क्या
चीज़
थी
जवानी
भी
अब
तो
दिन-रात
याद
आती
है
मय
से
तौबा
तो
की
'अज़ीज़'
मगर
अक्सर
औक़ात
याद
आती
है
Read Full
Aziz Lakhnavi
Download Image
1 Like
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Pagal Shayari
Murder Shayari
Tanz Shayari
Kahani Shayari
Mazhab Shayari