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Shadan Ahsan Marehrvi
ho gayi ab vida teri chaahat
ho gayi ab vida teri chaahat | हो गई अब विदा तेरी चाहत
- Shadan Ahsan Marehrvi
हो
गई
अब
विदा
तेरी
चाहत
उसकी
तस्वीर
भी
जला
देना
- Shadan Ahsan Marehrvi
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फिर
किसी
के
सामने
चश्म-ए-तमन्ना
झुक
गई
शौक़
की
शोख़ी
में
रंग-ए-एहतराम
आ
ही
गया
Asrar Ul Haq Majaz
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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मैं
सो
रहा
हूँ
तेरे
ख़्वाब
देखने
के
लिए
ये
आरज़ू
है
कि
आँखों
में
रात
रह
जाए
Shakeel Azmi
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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काम
के
बोझ
तले
दब
गए
तो
समझे
हम
लोग
क्यूँँ
चाह
के
भी
दिल
का
नहीं
कर
पाते
Jangveer Singh Rakesh
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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हज़ारों
ख़्वाहिशें
ऐसी
कि
हर
ख़्वाहिश
पे
दम
निकले
बहुत
निकले
मिरे
अरमान
लेकिन
फिर
भी
कम
निकले
Mirza Ghalib
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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मुश्किलों
में
क़रार
की
सूरत
कोई
निकले
बहार
की
सूरत
तू
जो
रूठा
है
तो
चमन
में
अब
गुल
भी
निकले
हैं
ख़ार
की
सूरत
रुख़
से
पर्दा
हटा
सबा
उसके
मुझको
दिखला
दे
यार
की
सूरत
मुस्कुरा
कर
किया
सितम
मुझ
पर
उसने
बदली
न
वार
की
सूरत
जब
दवा
कोई
भी
असर
न
करे
काम
करती
है
यार
की
सूरत
बाज़ी-ए-इश्क़
जीत
कर
ज़ाहिद
मैंने
देखी
है
हार
की
सूरत
सूरत-ए-हाल
हैं
मेरे
जैसे
है
वही
ग़मगुसार
की
सूरत
गुल
से
हटती
नहीं
नज़र
शादान
कौन
देखे
है
ख़ार
की
सूरत
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Shadan Ahsan Marehrvi
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बज़ाहिर
जो
हिमायत
कर
रहे
हैं
वही
पीछे
बग़ावत
कर
रहे
हैं
पता
ग़ैरों
से
ये
मुझको
चला
है
मेरे
अपने
अदावत
कर
रहे
हैं
बहुत
दिन
बाद
लौटा
हूँ
जो
घर
तो
तेरे
तेवर
शिकायत
कर
रहे
हैं
वही
पलकें
तुम्हारी
कह
रही
हैं
वही
गेसू
शिकायत
कर
रहे
हैं
ख़ुदा
का
शुक्र
है
अच्छे
सुख़नवर
मेरे
शे'रों
पे
हैरत
कर
रहे
हैं
बहुत
ही
एहतियातों
को
बरतना
मोहब्बत
में
नसीहत
कर
रहे
हैं
ये
सौदागर
क़यामत
से
डराकर
ख़ुदा
की
अब
तिजारत
कर
रहे
हैं
कोई
हक़
पर
हो
तो
सर
को
कटाए
ये
नेज़े
फिर
से
हसरत
कर
रहे
हैं
अमीर-ए-शहर
के
क़िस्से
सुना
कर
नई
नस्लों
को
ग़ारत
कर
रहे
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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ज़िन्दा
होते
हैं
रोज़
मरते
हैं
लोग
पागल
हैं
इश्क़
करते
हैं
हमको
कहनी
है
उन
सेे
बात
वही
बात
कहते
सभी
जो
डरते
हैं
और
डरते
नहीं
किसी
शय
से
उनकी
नाराज़गी
से
डरते
हैं
गुफ़्तगू
उन
सेे
कैसे
की
जाए
बात
करते
हैं
फूल
झड़ते
हैं
डर
ख़ुदास
ज़रा
नहीं
लगता
हिज्र
की
वहशतों
से
डरते
हैं
रोज़
करते
हैं
वस्ल
के
वादे
रोज़
वादे
से
वो
मुकरते
हैं
साफ़
कहते
हैं
बात
हम
फिर
भी
आँखों
में
आपकी
अखरते
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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वादा-ए-वस्ल
मुझ
से
टूट
गया
मैंने
छोड़ी
न
आम
की
दावत
Shadan Ahsan Marehrvi
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मसअले
इश्क़
के
मैं
हल
कर
दूँ
जज़्बा-ए-दिल
में
जो
बदल
कर
दूँ
तेरी
रंगत
में
ढाल
कर
मिसरे
तुझ
सेे
मंसूब
इक
ग़ज़ल
कर
दूँ
वहशत-ए-हिज्र
है
मुझे
दरपेश
कैसे
मुमकिन
है
इसको
हल
कर
दूँ
शे'र
मंसूब
जो
न
हों
तुझ
सेे
उन
में
पैदा
कोई
ख़लल
कर
दूँ
वक़्त
से
जो
मिले
हसीं
लम्हें
नाम
तेरे
वो
सारे
पल
कर
दूँ
तू
जो
कह
दे
तो
फिर
तेरी
ख़ातिर
मैं
भी
तामीर
इक
महल
कर
दूँ
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Shadan Ahsan Marehrvi
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