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Shadan Ahsan Marehrvi
mushkilon men qaraar ki soorat
mushkilon men qaraar ki soorat | मुश्किलों में क़रार की सूरत
- Shadan Ahsan Marehrvi
मुश्किलों
में
क़रार
की
सूरत
कोई
निकले
बहार
की
सूरत
तू
जो
रूठा
है
तो
चमन
में
अब
गुल
भी
निकले
हैं
ख़ार
की
सूरत
रुख़
से
पर्दा
हटा
सबा
उसके
मुझको
दिखला
दे
यार
की
सूरत
मुस्कुरा
कर
किया
सितम
मुझ
पर
उसने
बदली
न
वार
की
सूरत
जब
दवा
कोई
भी
असर
न
करे
काम
करती
है
यार
की
सूरत
बाज़ी-ए-इश्क़
जीत
कर
ज़ाहिद
मैंने
देखी
है
हार
की
सूरत
सूरत-ए-हाल
हैं
मेरे
जैसे
है
वही
ग़मगुसार
की
सूरत
गुल
से
हटती
नहीं
नज़र
शादान
कौन
देखे
है
ख़ार
की
सूरत
- Shadan Ahsan Marehrvi
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नदी
आँखें
भँवर
ज़ुल्फ़ें
कहाँ
तैरूँ
कहाँ
डूबूँ
कि
तेरे
शहर
में
सब
की
अदाएँ
एक
जैसी
हैं
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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हाए
उसके
हाथ
पीले
होने
का
ग़म
इतना
रोए
हैं
कि
आँखें
लाल
कर
ली
Harsh saxena
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वो
आँखें
बुझ
चुकी
होंगी
नज़ारा
हो
चुका
होगा
'अली'
वो
शख़्स
अब
दुनिया
को
प्यारा
हो
चुका
होगा
Ali Zaryoun
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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वो
आँखें
आपके
ग़म
में
नहीं
हुई
हैं
नम
दिया
जलाते
हुए
हाथ
जल
गया
होगा
Shadab Javed
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नहीं
है
लब
पे
दिखावे
का
भी
तबस्सुम
अब
हमें
किसी
ने
मुक़म्मल
उदास
कर
दिया
है
Amaan Haider
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तुझ
तक
आने
का
सफ़र
इतना
भी
आसाँ
तो
न
था
तूने
फेरी
है
नज़र
हम
सेे
जिस
आसानी
से
Mohit Dixit
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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हमारे
सीने
पे
उँगलियों
से
तुम
अपना
चेहरा
बना
रहे
थे
तुम्हें
कुछ
उस
की
ख़बर
नहीं
थी
हमारे
दिल
में
जो
चल
रहा
था
Nadim Nadeem
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नज़र
में
रखना
कहीं
कोई
ग़म
शनास
गाहक
मुझे
सुख़न
बेचना
है
ख़र्चा
निकालना
है
Umair Najmi
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तुझ
को
पाने
की
जुस्तुजू
में
फिर
और
इक
साल
राएगाँ
निकला
Shadan Ahsan Marehrvi
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देख
तेरे
फ़िराक़
में
जाना
किस
तरह
कट
रहा
दिसम्बर
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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ज़िंदा
होते
हैं
रोज़
मरते
हैं
लोग
पागल
हैं
इश्क़
करते
हैं
Shadan Ahsan Marehrvi
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दश्त
दरिया
दिखाई
देता
है
आब
सहरा
दिखाई
देता
है
देखता
हूँ
जो
चाँद
को
तककर
तेरा
चेहरा
दिखाई
देता
है
अब
तो
हर
मोड़
तेरे
कूँचे
को
मुझ
को
जाता
दिखाई
देता
है
तुझ
को
देखा
न
तूर
पर
मैंने
सिर्फ़
मूसा
दिखाई
देता
है
तेरे
आगे
तो
अब
मुझे
जाना
चाँद
मैला
दिखाई
देता
है
हिज्र
में
ढल
के
तू
भी
तो
वाइज़
मेरे
जैसा
दिखाई
देता
है
दश्त
में
फिरते
ढ़ोकरें
खाता
सिर्फ़
राँझा
दिखाई
देता
है
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Shadan Ahsan Marehrvi
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मयकदों
में
तो
आम
पीते
हैं
हम
निगाहों
से
जाम
पीते
हैं
तेरी
तस्वीर
सामने
रखकर
करके
तुझ
सेे
कलाम
पीते
हैं
ग़म-ए-फ़ुर्क़त
में
दो
ही
घूँट
फ़क़त
आप
करते
हैं
नाम
पीते
हैं
आओ
पी
लो
के
सुब्ह
सादिक़
है
आओ
बैठो
है
शाम
पीते
हैं
मैं
ज़माने
को
मय-कदे
सा
लगूँ
आओ
इस
तरह
जाम
पीते
हैं
क़ैद
बोतल
में
हैं
अजब
जलवे
आज
बोतल
तमाम
पीते
हैं
घिर
के
आईं
घटाएँ
सावन
की
कीजे
कुछ
इंतिज़ाम
पीते
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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