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Shadan Ahsan Marehrvi
dasht dariyaa dikhaai deta hai
dasht dariyaa dikhaai deta hai | दश्त दरिया दिखाई देता है
- Shadan Ahsan Marehrvi
दश्त
दरिया
दिखाई
देता
है
आब
सहरा
दिखाई
देता
है
देखता
हूँ
जो
चाँद
को
तककर
तेरा
चेहरा
दिखाई
देता
है
अब
तो
हर
मोड़
तेरे
कूँचे
को
मुझ
को
जाता
दिखाई
देता
है
तुझ
को
देखा
न
तूर
पर
मैंने
सिर्फ़
मूसा
दिखाई
देता
है
तेरे
आगे
तो
अब
मुझे
जाना
चाँद
मैला
दिखाई
देता
है
हिज्र
में
ढल
के
तू
भी
तो
वाइज़
मेरे
जैसा
दिखाई
देता
है
दश्त
में
फिरते
ढ़ोकरें
खाता
सिर्फ़
राँझा
दिखाई
देता
है
- Shadan Ahsan Marehrvi
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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उम्र-भर
के
सज्दों
से
मिल
नहीं
सकी
जन्नत
ख़ुल्द
से
निकलने
को
इक
गुनाह
काफ़ी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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मैं
कुछ
दिन
से
अचानक
फिर
अकेला
पड़
गया
हूँ
नए
मौसम
में
इक
वहशत
पुरानी
काटती
है
Liaqat Jafri
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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इक
और
दरिया
का
सामना
था
'मुनीर'
मुझ
को
मैं
एक
दरिया
के
पार
उतरा
तो
मैंने
देखा
Muneer Niyazi
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तुम
ने
किया
है
तुम
ने
इशारा
बहुत
ग़लत
दरिया
बहुत
दुरुस्त
किनारा
बहुत
ग़लत
Nabeel Ahmed Nabeel
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तुम्हारे
पाँव
क़सम
से
बहुत
ही
प्यारे
हैं
ख़ुदा
करे
मेरे
बच्चों
की
इन
में
जन्नत
हो
Rafi Raza
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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तुम
मुझे
उतनी
ही
प्यारी
हो
मेरी
जाँ
जितना
प्यारा
है
कश्मीर
इस
देश
को
Alankrat Srivastava
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शब
बसर
करनी
है,
महफ़ूज़
ठिकाना
है
कोई
कोई
जंगल
है
यहाँ
पास
में
?
सहरा
है
कोई
?
Umair Najmi
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सींचते
ख़ून
से
रहे
मक़्तल
तपते
सेहरा
में
वो
ख़ुदा
वाले
इन
निगाहों
में
बेश्तर
मेरी
क़ैद
मंज़र
हैं
करबला
वाले
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Shadan Ahsan Marehrvi
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सबको
मरना
है
एक
रोज़
मगर
तेरे
मरने
ने
हमको
मार
दिया
Shadan Ahsan Marehrvi
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उन
निगाहों
को
जबसे
देखा
है
होश
दर-दर
भटकते
देखा
है
रंज
राहत
में
ढलते
देखा
है
जब
भी
उसको
सँवरते
देखा
है
सुर्ख़
फूलों
से
उड़के
तितली
को
उसके
लब
पर
ठहरते
देखा
है
इश्क़
की
आड़
में
दो
जिस्मों
को
मैंने
कपड़े
बदलते
देखा
है
मौत
से
जो
नहीं
डरा
उसको
मैंने
फुरक़त
से
डरते
देखा
है
तेरी
ख़्वाहिश
में
जाने
कितनों
का
दम-ब-दम
दम
निकलते
देखा
है
तेरे
दीदार
के
लिए
शब
भर
चाँद
छत
पर
टहलते
देखा
है
ज़िंदा
रहने
की
कश्मकश
में
भी
मैंने
लोगों
को
मरते
देखा
है
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Shadan Ahsan Marehrvi
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मसअले
इश्क़
के
मैं
हल
कर
दूँ
जज़्बा-ए-दिल
में
जो
बदल
कर
दूँ
तेरी
रंगत
में
ढाल
कर
मिसरे
तुझ
सेे
मंसूब
इक
ग़ज़ल
कर
दूँ
वहशत-ए-हिज्र
है
मुझे
दरपेश
कैसे
मुमकिन
है
इसको
हल
कर
दूँ
शे'र
मंसूब
जो
न
हों
तुझ
सेे
उन
में
पैदा
कोई
ख़लल
कर
दूँ
वक़्त
से
जो
मिले
हसीं
लम्हें
नाम
तेरे
वो
सारे
पल
कर
दूँ
तू
जो
कह
दे
तो
फिर
तेरी
ख़ातिर
मैं
भी
तामीर
इक
महल
कर
दूँ
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Shadan Ahsan Marehrvi
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मुश्किलों
में
क़रार
की
सूरत
कोई
निकले
बहार
की
सूरत
तू
जो
रूठा
है
तो
चमन
में
अब
गुल
भी
निकले
हैं
ख़ार
की
सूरत
रुख़
से
पर्दा
हटा
सबा
उसके
मुझको
दिखला
दे
यार
की
सूरत
मुस्कुरा
कर
किया
सितम
मुझ
पर
उसने
बदली
न
वार
की
सूरत
जब
दवा
कोई
भी
असर
न
करे
काम
करती
है
यार
की
सूरत
बाज़ी-ए-इश्क़
जीत
कर
ज़ाहिद
मैंने
देखी
है
हार
की
सूरत
सूरत-ए-हाल
हैं
मेरे
जैसे
है
वही
ग़मगुसार
की
सूरत
गुल
से
हटती
नहीं
नज़र
शादान
कौन
देखे
है
ख़ार
की
सूरत
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Shadan Ahsan Marehrvi
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