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Shadan Ahsan Marehrvi
un nigaahon ko jabse dekha hai
un nigaahon ko jabse dekha hai | उन निगाहों को जबसे देखा है
- Shadan Ahsan Marehrvi
उन
निगाहों
को
जबसे
देखा
है
होश
दर-दर
भटकते
देखा
है
रंज
राहत
में
ढलते
देखा
है
जब
भी
उसको
सँवरते
देखा
है
सुर्ख़
फूलों
से
उड़के
तितली
को
उसके
लब
पर
ठहरते
देखा
है
इश्क़
की
आड़
में
दो
जिस्मों
को
मैंने
कपड़े
बदलते
देखा
है
मौत
से
जो
नहीं
डरा
उसको
मैंने
फुरक़त
से
डरते
देखा
है
तेरी
ख़्वाहिश
में
जाने
कितनों
का
दम-ब-दम
दम
निकलते
देखा
है
तेरे
दीदार
के
लिए
शब
भर
चाँद
छत
पर
टहलते
देखा
है
ज़िंदा
रहने
की
कश्मकश
में
भी
मैंने
लोगों
को
मरते
देखा
है
- Shadan Ahsan Marehrvi
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कुछ
ख़ास
तो
बदला
नहीं
जाने
से
तुम्हारे
बस
राब्ता
कम
हो
गया
फूलों
की
दुकाँ
से
Ashu Mishra
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ख़ास
तो
कुछ
भी
नहीं
बदला
तुम्हारे
बाद
में
पहले
गुम
रहता
था
तुम
में,
अब
तुम्हारी
याद
में
मोल
हासिल
हो
गया
है
मुझको
इक-इक
शे'र
का
सब
दिलासे
दे
रहे
हैं
मुझको
"जस्सर"
दाद
में
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Avtar Singh Jasser
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ये
रंग-ओ-नस्ल
और
तशद्दुद
के
सिलसिले
दुश्मन
की
राहतों
के
सिवा
और
कुछ
नहीं
Fatima wasiya jaayasi
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जुदा
किसी
से
किसी
का
ग़रज़
हबीब
न
हो
ये
दाग़
वो
है
कि
दुश्मन
को
भी
नसीब
न
हो
Nazeer Akbarabadi
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तेरी
तारीफ़
करने
लग
गए
हैं
तेरे
दुश्मन
हमारे
शे'र
सुनके
Tanoj Dadhich
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इस
आ
समाँ
को
मुझ
सेे
है
क्या
दुश्मनी
"अली"?
भेजूं
अगर
दु'आ
भी
तो
सर
पर
लगे
मुझे
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Ali Rumi
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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आप
बच्चों
का
दिल
नहीं
तोड़ें
भाई
ये
दुश्मनी
हमारी
है
Vishnu virat
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मुझे
दुश्मन
से
भी
ख़ुद्दारी
की
उम्मीद
रहती
है
किसी
का
भी
हो
सर
क़दमों
में
सर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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दुश्मनी
जम
कर
करो
लेकिन
ये
गुंजाइश
रहे
जब
कभी
हम
दोस्त
हो
जाएँ
तो
शर्मिंदा
न
हों
Bashir Badr
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देख
तेरे
फ़िराक़
में
जाना
किस
तरह
कट
रहा
दिसम्बर
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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ज़बाने
दाग़
में
मैंने
उसे
लिखी
चिट्ठी
मिज़ाजे
मीर
में
उसने
मुझे
जवाब
दिया
Shadan Ahsan Marehrvi
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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दश्त
दरिया
दिखाई
देता
है
आब
सहरा
दिखाई
देता
है
देखता
हूँ
जो
चाँद
को
तककर
तेरा
चेहरा
दिखाई
देता
है
अब
तो
हर
मोड़
तेरे
कूँचे
को
मुझ
को
जाता
दिखाई
देता
है
तुझ
को
देखा
न
तूर
पर
मैंने
सिर्फ़
मूसा
दिखाई
देता
है
तेरे
आगे
तो
अब
मुझे
जाना
चाँद
मैला
दिखाई
देता
है
हिज्र
में
ढल
के
तू
भी
तो
वाइज़
मेरे
जैसा
दिखाई
देता
है
दश्त
में
फिरते
ढ़ोकरे
खाता
सिर्फ़
राँझा
दिखाई
देता
है
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Shadan Ahsan Marehrvi
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ज़िंदा
होते
हैं
रोज़
मरते
हैं
लोग
पागल
हैं
इश्क़
करते
हैं
Shadan Ahsan Marehrvi
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