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Shadan Ahsan Marehrvi
dasht dariyaa dikhaai deta hai
dasht dariyaa dikhaai deta hai | दश्त दरिया दिखाई देता है
- Shadan Ahsan Marehrvi
दश्त
दरिया
दिखाई
देता
है
आब
सहरा
दिखाई
देता
है
देखता
हूँ
जो
चाँद
को
तककर
तेरा
चेहरा
दिखाई
देता
है
अब
तो
हर
मोड़
तेरे
कूँचे
को
मुझ
को
जाता
दिखाई
देता
है
तुझ
को
देखा
न
तूर
पर
मैंने
सिर्फ़
मूसा
दिखाई
देता
है
तेरे
आगे
तो
अब
मुझे
जाना
चाँद
मैला
दिखाई
देता
है
हिज्र
में
ढल
के
तू
भी
तो
वाइज़
मेरे
जैसा
दिखाई
देता
है
दश्त
में
फिरते
ढ़ोकरे
खाता
सिर्फ़
राँझा
दिखाई
देता
है
- Shadan Ahsan Marehrvi
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कितना
झूठा
था
अपना
सच्चा
इश्क़
हिज्र
से
दोनों
ज़िंदा
बच
निकले
Prit
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पहले
लगा
था
हिज्र
में
जाएँगे
जान
से
पर
जी
रहे
हैं
और
भी
हम
इत्मीनान
से
Ankit Maurya
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काट
पाऊँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
तेरे
बग़ैर
तीन
दिन
का
हिज्र
मुझ
को
लग
रहा
है
तीन
साल
Afzal Ali Afzal
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हिज्र
में
ख़ुद
को
तसल्ली
दी
कहा
कुछ
भी
नहीं
दिल
मगर
हँसने
लगा
आया
बड़ा
कुछ
भी
नहीं
Afkar Alvi
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इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
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Idris Babar
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उस
हिज्र
पे
तोहमत
कि
जिसे
वस्ल
की
ज़िद
हो
उस
दर्द
पे
ला'नत
की
जो
अशआ'र
में
आ
जाए
Vipul Kumar
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियाँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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बिछड़
जाएँगे
हम
दोनों
ज़मीं
पर
ये
उस
ने
आसमाँ
पर
लिख
दिया
है
Siraj Faisal Khan
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जहाँ
से
जी
न
लगे
तुम
वहीं
बिछड़
जाना
मगर
ख़ुदा
के
लिए
बे-वफ़ाई
न
करना
Munawwar Rana
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मैं
अपनी
हिजरत
का
हाल
लगभग
बता
चुका
था
सभी
को
और
बस
तिरे
मोहल्ले
के
सारे
लड़के
हवा
बनाने
में
लग
गए
थे
Vikram Gaur Vairagi
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अक़्ल
ने
सैकड़ों
दलीलें
दीं
दिल
ने
हरगिज़
न
बात
इक
मानी
Shadan Ahsan Marehrvi
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शौक़े
आज़ादी-ए-हवस
में
कटी
उम्र
जितनी
मेरी
क़फ़स
में
कटी
Shadan Ahsan Marehrvi
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ज़िंदा
होते
हैं
रोज़
मरते
हैं
लोग
पागल
हैं
इश्क़
करते
हैं
Shadan Ahsan Marehrvi
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मैं
जो
वहशत
से
ऊब
जाऊँगा
मौजे
दरया
में
डूब
जाऊँगा
कितनी
गहरी
हैं
कत्थई
आँखें
इन
निगाहों
में
डूब
जाऊँगा
इस
क़दर
चाहेगी
जो
तू
मुझको
तेरी
चाहत
से
ऊब
जाऊँगा
लाख
मुझ
पर
भले
लगे
तोहमत
कू-ए-जानाँ
में
ख़ूब
जाऊँगा
ना
ख़ुदा
को
अगर
ख़ुदा
समझूँ
इस
सेे
अच्छा
मैं
डूब
जाऊँगा
इश्क़
की
मौज
तेज़
है
शादान
मैं
जो
तैरा
तो
डूब
जाऊँगा
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Shadan Ahsan Marehrvi
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लोग
जब
मुस्कुरा
के
मिलते
हैं
कफ़
में
ख़ंजर
छुपा
के
मिलते
हैं
कैसी
सूरत
बना
के
मिलते
हैं
कई
चेहरे
लगा
के
मिलते
हैं
हिज्र
में
उनके
कैसी
गरमाइश
सर्द
झोंके
हवा
के
मिलते
हैं
और
माज़ी
में
कुछ
नहीं
मिलता
चंद
वादे
वफ़ा
के
मिलते
हैं
जल
चुकी
बस्तियों
की
साज़िश
में
कुछ
इरादे
हवा
के
मिलते
हैं
बाद
मुद्दत
बहार
आती
है
पहले
मौसम
ख़ला
के
मिलते
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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