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Shadan Ahsan Marehrvi
main jo vehshat se oob jaaunga
main jo vehshat se oob jaaunga | मैं जो वहशत से ऊब जाऊँगा
- Shadan Ahsan Marehrvi
मैं
जो
वहशत
से
ऊब
जाऊँगा
मौजे
दरया
में
डूब
जाऊँगा
कितनी
गहरी
हैं
कत्थई
आँखें
इन
निगाहों
में
डूब
जाऊँगा
इस
क़दर
चाहेगी
जो
तू
मुझको
तेरी
चाहत
से
ऊब
जाऊँगा
लाख
मुझ
पर
भले
लगे
तोहमत
कू-ए-जानाँ
में
ख़ूब
जाऊँगा
ना
ख़ुदा
को
अगर
ख़ुदा
समझूँ
इस
सेे
अच्छा
मैं
डूब
जाऊँगा
इश्क़
की
मौज
तेज़
है
शादान
मैं
जो
तैरा
तो
डूब
जाऊँगा
- Shadan Ahsan Marehrvi
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शिकस्ता
नाव
समझ
कर
डुबोने
वाले
लोग
न
पा
सके
मुझे
साहिल
पे
खोने
वाले
लोग
ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
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Kashif Sayyed
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वो
जो
प्यासा
लगता
था
सैलाब-ज़दा
था
पानी
पानी
कहते
कहते
डूब
गया
है
Aanis Moin
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कितना
महफ़ूज़
हूँ
मैं
कोने
में
कोई
अड़चन
नहीं
है
रोने
में
मैंने
उसको
बचा
लिया
वरना
डूब
जाता
मुझे
डुबोने
में
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Fahmi Badayuni
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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मैं
इस
ख़याल
से
शर्मिंदगी
में
डूब
गया
कि
मेरे
होते
हुए
वो
नदी
में
डूब
गया
Siraj Faisal Khan
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आज
की
रात
न
जाने
कितनी
लंबी
होगी
आज
का
सूरज
शाम
से
पहले
डूब
गया
है
Aanis Moin
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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जो
उस
तरफ़
से
इशारा
कभी
किया
उस
ने
मैं
डूब
जाऊंगा
दरिया
को
पार
करते
हुए
Ghulam Murtaza Rahi
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वो
थे
जवाब
के
साहिल
पे
मुंतज़िर
लेकिन
समय
की
नाव
में
मेरा
सवाल
डूब
गया
Bekal Utsahi
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उनकी
आँखें
झील
हैं
तो
क्या
करें
डूब
जाएँ
काम
धंधा
छोड़
दें?
Saurabh Sharma 'sadaf'
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अब
तो
घर
मुझको
घर
नहीं
लगता
दिल
मेरा
इक
पहर
नहीं
लगता
ज़िन्दगी
अब
सज़ा
सी
लगती
है
मौत
से
भी
तो
डर
नहीं
लगता
छोड़
कर
जबसे
तुम
गए
मुर्शिद
अच्छा
अब
रहगुज़र
नहीं
लगता
कैसे
मुमकिन
हो
लौट
आओ
तुम
रेत
में
तो
शजर
नहीं
लगता
वो
जो
इक
पेड़
था
हरा
उस
में
कोई
भी
अब
समर
नहीं
लगता
क़ैदख़ाना
है
घर
तुम्हारे
बिन
घर
ज़रा
सा
भी
घर
नहीं
लगता
मुन्तक़िल
जब
से
हो
गए
हो
तुम
दिल
हमारा
इधर
नहीं
लगता
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Shadan Ahsan Marehrvi
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देख
तेरे
फ़िराक़
में
जाना
किस
तरह
कट
रहा
दिसम्बर
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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दश्त
दरिया
दिखाई
देता
है
आब
सहरा
दिखाई
देता
है
देखता
हूँ
जो
चाँद
को
तककर
तेरा
चेहरा
दिखाई
देता
है
अब
तो
हर
मोड़
तेरे
कूँचे
को
मुझ
को
जाता
दिखाई
देता
है
तुझ
को
देखा
न
तूर
पर
मैंने
सिर्फ़
मूसा
दिखाई
देता
है
तेरे
आगे
तो
अब
मुझे
जाना
चाँद
मैला
दिखाई
देता
है
हिज्र
में
ढल
के
तू
भी
तो
वाइज़
मेरे
जैसा
दिखाई
देता
है
दश्त
में
फिरते
ढ़ोकरे
खाता
सिर्फ़
राँझा
दिखाई
देता
है
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Shadan Ahsan Marehrvi
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बदगुमाँ
जो
हों
उन
सेे
कह
देना
तुमको
रानी
बना
के
रक्खूँगा
Shadan Ahsan Marehrvi
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मसअले
इश्क़
के
मैं
हल
कर
दूँ
जज़्बा-ए-दिल
में
जो
बदल
कर
दूँ
तेरी
रंगत
में
ढाल
कर
मिसरे
तुझ
सेे
मंसूब
इक
ग़ज़ल
कर
दूँ
वहशत-ए-हिज्र
है
मुझे
दरपेश
कैसे
मुमकिन
है
इसको
हल
कर
दूँ
शे'र
मंसूब
जो
न
हों
तुझ
सेे
उन
में
पैदा
कोई
ख़लल
कर
दूँ
वक़्त
से
जो
मिले
हसीं
लम्हें
नाम
तेरे
वो
सारे
पल
कर
दूँ
तू
जो
कह
दे
तो
फिर
तेरी
ख़ातिर
मैं
भी
तामीर
इक
महल
कर
दूँ
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Shadan Ahsan Marehrvi
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