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Shadan Ahsan Marehrvi
masale ishq ke main hal kar doon
masale ishq ke main hal kar doon | मसअले इश्क़ के मैं हल कर दूँ
- Shadan Ahsan Marehrvi
मसअले
इश्क़
के
मैं
हल
कर
दूँ
जज़्बा-ए-दिल
में
जो
बदल
कर
दूँ
तेरी
रंगत
में
ढाल
कर
मिसरे
तुझ
सेे
मंसूब
इक
ग़ज़ल
कर
दूँ
वहशत-ए-हिज्र
है
मुझे
दरपेश
कैसे
मुमकिन
है
इसको
हल
कर
दूँ
शे'र
मंसूब
जो
न
हों
तुझ
सेे
उन
में
पैदा
कोई
ख़लल
कर
दूँ
वक़्त
से
जो
मिले
हसीं
लम्हें
नाम
तेरे
वो
सारे
पल
कर
दूँ
तू
जो
कह
दे
तो
फिर
तेरी
ख़ातिर
मैं
भी
तामीर
इक
महल
कर
दूँ
- Shadan Ahsan Marehrvi
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इस
मरज़
से
कोई
बचा
भी
है
चारा-गर
इश्क़
की
दवा
भी
है
Unknown
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मुझे
उस
सेे
मुहब्बत
सच
बड़ी
महँगी
पड़ेगी
अकेलेपन
से
उसने
इश्क़
ऐसा
कर
लिया
है
Anukriti 'Tabassum'
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इश्क़
मेरी
ज़ुबान
से
निकला
और
मैं
ख़ानदान
से
निकला
Siraj Faisal Khan
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सुनते
हैं
इश्क़
नाम
के
गुज़रे
हैं
इक
बुज़ुर्ग
हम
लोग
भी
फ़क़ीर
इसी
सिलसिले
के
हैं
Firaq Gorakhpuri
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अगर
तुम
हो
तो
घबराने
की
कोई
बात
थोड़ी
है
ज़रा
सी
बूँदा-बाँदी
है
बहुत
बरसात
थोड़ी
है
ये
राह-ए-इश्क़
है
इस
में
क़दम
ऐसे
ही
उठते
हैं
मोहब्बत
सोचने
वालों
के
बस
की
बात
थोड़ी
है
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Abrar Kashif
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तुमने
जब
से
अपनी
पलकों
पर
रक्खा
कालिख़
को
सब
काजल
काजल
कहते
हैं
इश्क़
में
पागल
ही
तो
होना
होता
है
पागल
हैं
जो
मुझको
पागल
कहते
हैं
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Vishal Bagh
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ये
फ़न्न-ए-इश्क़
है
आवे
उसे
तीनत
में
जिस
की
हो
तू
ज़ाहिद
पीर-ए-नाबालिग़
है
बे-तह
तुझ
को
क्या
आवे
Meer Taqi Meer
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गुदाज़-ए-इश्क़
नहीं
कम
जो
मैं
जवाँ
न
रहा
वही
है
आग
मगर
आग
में
धुआँ
न
रहा
Jigar Moradabadi
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सताना
रूठ
जाना
और
मनाना
इश्क़
है
लेकिन
अगर
हद
से
ज़ियादा
हो
तो
रिश्ते
टूट
जाते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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ज़िन्दगी
से
ऐसे
काटा
सीन
उसने
इश्क़
का
देखता
है
कोई
जैसे
फ़िल्म
गाने
काट
कर
Ankit Maurya
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देख
तेरे
फ़िराक़
में
जाना
किस
तरह
कट
रहा
दिसम्बर
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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उन
निगाहों
को
जबसे
देखा
है
होश
दर-दर
भटकते
देखा
है
रंज
राहत
में
ढलते
देखा
है
जब
भी
उसको
सँवरते
देखा
है
सुर्ख़
फूलों
से
उड़के
तितली
को
उसके
लब
पर
ठहरते
देखा
है
इश्क़
की
आड़
में
दो
जिस्मों
को
मैंने
कपड़े
बदलते
देखा
है
मौत
से
जो
नहीं
डरा
उसको
मैंने
फुरक़त
से
डरते
देखा
है
तेरी
ख़्वाहिश
में
जाने
कितनों
का
दम-ब-दम
दम
निकलते
देखा
है
तेरे
दीदार
के
लिए
शब
भर
चाँद
छत
पर
टहलते
देखा
है
ज़िंदा
रहने
की
कश्मकश
में
भी
मैंने
लोगों
को
मरते
देखा
है
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Shadan Ahsan Marehrvi
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दिल
को
मेरे
मलाल
कैसा
है
अलग़रज़
ये
ज़वाल
कैसा
है
हिज्र
तूने
जिया
नहीं
वाइज़
क्या
कहूँ
तुझ
सेे
हाल
कैसा
है
मेरी
हर
बात
से
गिला
है
उसे
जाने
वो
हमख़याल
कैसा
है
यूँँ
करे
रब
कि
जब
पड़े
मुश्किल
मुझ
सेे
पूछे
कि
हाल
कैसा
है
वक़्त-ए-मुश्किल
में
हौसला
रखना
चल
खड़ा
हो
निढ़ाल
कैसा
है
बारहा
सोचता
हूँ
मैं
अक्सर
जाने
मेरा
ख़याल
कैसा
है
इक
बिरहमन
ने
फिर
कहा
अच्छा
देखते
हैं
कि
साल
कैसा
है
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Shadan Ahsan Marehrvi
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सबको
मरना
है
एक
रोज़
मगर
तेरे
मरने
ने
हमको
मार
दिया
Shadan Ahsan Marehrvi
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वादा-ए-वस्ल
मुझ
से
टूट
गया
मैंने
छोड़ी
न
आम
की
दावत
Shadan Ahsan Marehrvi
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