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Siraj Faisal Khan
ishq meri zubaan se niklaa
ishq meri zubaan se niklaa | इश्क़ मेरी ज़ुबान से निकला
- Siraj Faisal Khan
इश्क़
मेरी
ज़ुबान
से
निकला
और
मैं
ख़ानदान
से
निकला
- Siraj Faisal Khan
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उन
आँखों
का
मुझ
से
कोई
वा'दा
तो
नहीं
है
थोड़ी
सी
मोहब्बत
है
ज़ियादा
तो
नहीं
है
Firasat rizvi
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कितना
झूठा
था
अपना
सच्चा
इश्क़
हिज्र
से
दोनों
ज़िंदा
बच
निकले
Prit
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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ऐ
मौज-ए-हवादिस
तुझे
मालूम
नहीं
क्या
हम
अहल-ए-मोहब्बत
हैं
फ़ना
हो
नहीं
सकते
Asad Bhopali
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मोहब्बत
का
नहीं
इक
दिन
मुकर्रर
मोहब्बत
उम्रभर
का
सिलसिला
है
Neeraj Naveed
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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शायद
मुझे
किसी
से
मोहब्बत
नहीं
हुई
लेकिन
यक़ीन
सब
को
दिलाता
रहा
हूँ
मैं
Jaun Elia
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कोई
समझे
तो
एक
बात
कहूँ
इश्क़
तौफ़ीक़
है
गुनाह
नहीं
Firaq Gorakhpuri
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कितना
अजीब
है
ये
मोहब्बत
का
खेल
भी
हम
हार
कर
भी
इस
में
कई
रोज़
ख़ुश
रहे
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Khalid Azad
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सूख
जाता
जल्द
है
फिर
भी
निशानी
के
लिए
फूल
इक
छुप
के
किताबों
में
छिपाना
इश्क़
है
Parul Singh "Noor"
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त'अल्लुक़
तोड़
कर
उस
की
गली
से
कभी
मैं
जुड़
न
पाया
ज़िंदगी
से
ख़ुदा
का
आदमी
को
डर
कहाँ
अब
वो
घबराता
है
केवल
आदमी
से
मिरी
ये
तिश्नगी
शायद
बुझेगी
किसी
मेरी
ही
जैसी
तिश्नगी
से
बहुत
चुभता
है
ये
मेरी
अना
को
तुम्हारा
बात
करना
हर
किसी
से
ख़सारे
को
ख़सारे
से
भरूँगा
निकालूँगा
उजाला
तीरगी
से
तुम्हें
ऐ
दोस्तो
मैं
जानता
हूँ
सुकूँ
मिलता
है
मेरी
बेकली
से
हवाओं
में
कहाँ
ये
दम
था
'फ़ैसल'
दिया
मेरा
बुझा
है
बुज़दिली
से
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Siraj Faisal Khan
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ज़मीं
पर
बस
लहू
बिखरा
हमारा
अभी
बिखरा
नहीं
जज़्बा
हमारा
हमें
रंजिश
नहीं
दरिया
से
कोई
सलामत
गर
रहे
सहरा
हमारा
मिला
कर
हाथ
सूरज
की
किरन
से
मुख़ालिफ़
हो
गया
साया
हमारा
रक़ीब
अब
वो
हमारे
हैं
जिन्होंने
नमक
ता-ज़िंदगी
खाया
हमारा
है
जब
तक
साथ
बंजारा-मिज़ाजी
कहाँ
मंज़िल
कहाँ
रस्ता
हमारा
त'अल्लुक़
तर्क
कर
के
हो
गया
है
ये
रिश्ता
और
भी
गहरा
हमारा
बहुत
कोशिश
की
लेकिन
जुड़
न
पाया
तुम्हारे
नाम
में
आधा
हमारा
इधर
सब
हम
को
क़ातिल
कह
रहे
हैं
उधर
ख़तरे
में
था
कुनबा
हमारा
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Siraj Faisal Khan
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कई
दिन
बाद
उस
ने
गुफ़्तुगू
की
कई
दिन
बाद
फिर
अच्छा
हुआ
मैं
Siraj Faisal Khan
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दिल
की
दीवार
पर
सिवा
उस
के
रंग
दूजा
कोई
चढ़ा
ही
नहीं
Siraj Faisal Khan
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बेनतीजा
रह
गईं
दिल्ली
में
सारी
बैठकें
अन्नदाता
खेत
की
मेड़ों
पे
भूखे
मर
गए
Siraj Faisal Khan
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Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
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