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Shadan Ahsan Marehrvi
mujhe khabar nahin gham kya hai aur khushi kya hai
mujhe khabar nahin gham kya hai aur khushi kya hai | मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है
- Shadan Ahsan Marehrvi
मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
- Shadan Ahsan Marehrvi
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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हाए
क्या
दौर-ए-ज़िंदगी
गुज़रा
वाक़िए
हो
गए
कहानी
से
Gulzar Dehlvi
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क्या
ख़ुशी
में
ज़िंदगी
का
होश
कम
रह
जाएगा
ग़म
अगर
मिट
भी
गया
एहसास-ए-ग़म
रह
जाएगा
Shakeel Badayuni
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जो
गुज़ारी
न
जा
सकी
हम
से
हम
ने
वो
ज़िन्दगी
गुज़ारी
है
Jaun Elia
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हम
भी
क्या
ज़िंदगी
गुज़ार
गए
दिल
की
बाज़ी
लगा
के
हार
गए
Dagh Dehlvi
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गँवाई
किस
की
तमन्ना
में
ज़िंदगी
मैं
ने
वो
कौन
है
जिसे
देखा
नहीं
कभी
मैं
ने
Jaun Elia
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क्यूँ
डरें
ज़िन्दगी
में
क्या
होगा
कुछ
न
होगा
तो
तजरबा
होगा
Javed Akhtar
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ज़िंदगी
और
चल
नहीं
सकती
आने
पे
मौत
टल
नहीं
सकती
Afzal Sultanpuri
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कुछ
बेटियाँ
बिन
बाप
के
भी
काटती
हैं
ज़िंदगी
कुछ
बेटियों
के
सिर
पे
दोनों
हाथ
माँ
के
होते
हैं
Bhoomi Srivastava
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तंग
आ
चुके
हैं
कशमकश-ए-ज़िंदगी
से
हम
ठुकरा
न
दें
जहाँ
को
कहीं
बे-दिली
से
हम
Sahir Ludhianvi
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मुश्किलों
में
क़रार
की
सूरत
कोई
निकले
बहार
की
सूरत
तू
जो
रूठा
है
तो
चमन
में
अब
गुल
भी
निकले
हैं
ख़ार
की
सूरत
रुख़
से
पर्दा
हटा
सबा
उसके
मुझको
दिखला
दे
यार
की
सूरत
मुस्कुरा
कर
किया
सितम
मुझ
पर
उसने
बदली
न
वार
की
सूरत
जब
दवा
कोई
भी
असर
न
करे
काम
करती
है
यार
की
सूरत
बाज़ी-ए-इश्क़
जीत
कर
ज़ाहिद
मैंने
देखी
है
हार
की
सूरत
सूरत-ए-हाल
हैं
मेरे
जैसे
है
वही
ग़मगुसार
की
सूरत
गुल
से
हटती
नहीं
नज़र
शादान
कौन
देखे
है
ख़ार
की
सूरत
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Shadan Ahsan Marehrvi
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रहगुज़र
पर
चले
अदब
की
जो
उनको
रस्ते
से
ही
उतार
दिया
बुग्ज़
से
भरके
अपने
सीनों
को
हाए
तुमने
अदब
को
मार
दिया
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अब
तो
घर
मुझको
घर
नहीं
लगता
दिल
मेरा
इक
पहर
नहीं
लगता
ज़िन्दगी
अब
सज़ा
सी
लगती
है
मौत
से
भी
तो
डर
नहीं
लगता
छोड़
कर
जबसे
तुम
गए
मुर्शिद
अच्छा
अब
रहगुज़र
नहीं
लगता
कैसे
मुमकिन
हो
लौट
आओ
तुम
रेत
में
तो
शजर
नहीं
लगता
वो
जो
इक
पेड़
था
हरा
उस
में
कोई
भी
अब
समर
नहीं
लगता
क़ैदख़ाना
है
घर
तुम्हारे
बिन
घर
ज़रा
सा
भी
घर
नहीं
लगता
मुन्तक़िल
जब
से
हो
गए
हो
तुम
दिल
हमारा
इधर
नहीं
लगता
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Shadan Ahsan Marehrvi
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सबको
मरना
है
एक
रोज़
मगर
तेरे
मरने
ने
हमको
मार
दिया
Shadan Ahsan Marehrvi
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मसअले
इश्क़
के
मैं
हल
कर
दूँ
जज़्बा-ए-दिल
में
जो
बदल
कर
दूँ
तेरी
रंगत
में
ढाल
कर
मिसरे
तुझ
सेे
मंसूब
इक
ग़ज़ल
कर
दूँ
वहशत-ए-हिज्र
है
मुझे
दरपेश
कैसे
मुमकिन
है
इसको
हल
कर
दूँ
शे'र
मंसूब
जो
न
हों
तुझ
सेे
उन
में
पैदा
कोई
ख़लल
कर
दूँ
वक़्त
से
जो
मिले
हसीं
लम्हें
नाम
तेरे
वो
सारे
पल
कर
दूँ
तू
जो
कह
दे
तो
फिर
तेरी
ख़ातिर
मैं
भी
तामीर
इक
महल
कर
दूँ
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Shadan Ahsan Marehrvi
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