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Shadan Ahsan Marehrvi
maykado men to aam peete hain
maykado men to aam peete hain | मयकदों में तो आम पीते हैं
- Shadan Ahsan Marehrvi
मयकदों
में
तो
आम
पीते
हैं
हम
निगाहों
से
जाम
पीते
हैं
तेरी
तस्वीर
सामने
रखकर
करके
तुझ
सेे
कलाम
पीते
हैं
ग़म-ए-फ़ुर्क़त
में
दो
ही
घूँट
फ़क़त
आप
करते
हैं
नाम
पीते
हैं
आओ
पी
लो
के
सुब्ह
सादिक़
है
आओ
बैठो
है
शाम
पीते
हैं
मैं
ज़माने
को
मय-कदे
सा
लगूँ
आओ
इस
तरह
जाम
पीते
हैं
क़ैद
बोतल
में
हैं
अजब
जलवे
आज
बोतल
तमाम
पीते
हैं
घिर
के
आईं
घटाएँ
सावन
की
कीजे
कुछ
इंतिज़ाम
पीते
हैं
- Shadan Ahsan Marehrvi
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तकल्लुफ़
छोड़कर
आओ
उसे
फिर
से
जिया
जाए
हमारा
बचपना
जो
एल्बमों
में
क़ैद
रहता
है
Shiva awasthi
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जन्नत
में
आ
गया
था
किसी
अप्सरा
पे
दिल
जिसकी
सज़ा-ए-मौत
में
दुनिया
मिली
मुझे
Ankit Maurya
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हमारे
कुछ
गुनाहों
की
सज़ा
भी
साथ
चलती
है
हम
अब
तन्हा
नहीं
चलते
दवा
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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वो
मेरा
जब
न
हो
सका
तो
फिर
यही
सज़ा
रहे
किसी
को
प्यार
जब
करूँँ
वो
छुप
के
देखता
रहे
Mazhar Imam
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मुझे
पहले
पहल
लगता
था
ज़ाती
मसअला
है
मैं
फिर
समझा
मोहब्बत
क़ायनाती
मसअला
है
परिंदे
क़ैद
हैं
तुम
चहचहाहट
चाहते
हो
तुम्हें
तो
अच्छा
ख़ासा
नफ़सयाती
मसअला
है
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Umair Najmi
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सज़ा
कितनी
बड़ी
है
गाँव
से
बाहर
निकलने
की
मैं
मिट्टी
गूँधता
था
अब
डबलरोटी
बनाता
हूँ
Munawwar Rana
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ज़िंदगी
से
बड़ी
सज़ा
ही
नहीं
और
क्या
जुर्म
है
पता
ही
नहीं
Krishna Bihari Noor
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भले
हैं
फ़ासले
क़ुर्बत
से
ख़ौफ़
लगता
है
ये
क्या
बला
है
जो
ऐसी
विरानी
क़ैद
हुई
Prashant Beybaar
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आज
पैवंद
की
ज़रूरत
है
ये
सज़ा
है
रफ़ू
न
करने
की
Fahmi Badayuni
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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रोग
दिल
का
बड़ा
ही
सरकश
है
ये
सितम
नाज़-ए-तर्ज़-ए-महवश
है
है
नज़र
शोख़
की
मेरे
दिल
पर
और
हाथों
में
उसके
तरकश
है
राज़
हस्ती
के
ये
ख़ुदा
जाने
कौन
सूफ़ी
है
कौन
मयकश
है
राज़
मजनू
ने
ये
कहा
सब
सेे
हाए
उल्फत
बड़ी
ही
सरकश
है
है
तिलावत
में
कैफ़
किस
दर्जा
आज
मस्जिद
में
कोई
मयकश
है
है
नुमाया
जो
अक्स
परदे
में
ये
नज़ारा
भी
ख़ूब
दिलकश
है
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Shadan Ahsan Marehrvi
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ज़िन्दगी
क्या
है
एक
सदमा
है
जी
का
जंजाल
है
तुम्हारे
बिन
Shadan Ahsan Marehrvi
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इक
कसक
दिल
में
कहीं
उठती
है
बेसबब
शे'र
नहीं
होता
है
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कोई
भी
काम
नहीं
है
मुझको
फिर
भी
आराम
नहीं
है
मुझको
जब
से
देखा
है
तेरी
आँखों
को
हाजत-ए-जाम
नहीं
है
मुझको
लाख
राहें
हो
जो
मुश्किल
मेरी
फ़िक्र-ए-अंजाम
नहीं
है
मुझको
भूल
बैठा
में
हुनर
सब
अपने
याद
कुछ
काम
नहीं
है
मुझको
तेरी
तदबीर
से
आए
क़रार
दर्द
वो
आम
नहीं
है
मुझको
तुमने
मरहम
जो
रखा
ज़ख़्मो
पर
इस
सेे
आराम
नहीं
है
मुझको
ज़ख़्म
ख़ारों
ने
दिए
हैं
फिर
भी
फ़िक्र-ए-आलाम
नहीं
है
मुझको
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Shadan Ahsan Marehrvi
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अब
तो
घर
मुझको
घर
नहीं
लगता
दिल
मेरा
इक
पहर
नहीं
लगता
ज़िन्दगी
अब
सज़ा
सी
लगती
है
मौत
से
भी
तो
डर
नहीं
लगता
छोड़
कर
जबसे
तुम
गए
मुर्शिद
अच्छा
अब
रहगुज़र
नहीं
लगता
कैसे
मुमकिन
हो
लौट
आओ
तुम
रेत
में
तो
शजर
नहीं
लगता
वो
जो
इक
पेड़
था
हरा
उस
में
कोई
भी
अब
समर
नहीं
लगता
क़ैदख़ाना
है
घर
तुमारे
बिन
घर
ज़रा
सा
भी
घर
नहीं
लगता
मुन्तक़िल
जब
से
हो
गए
हो
तुम
दिल
हमारा
इधर
नहीं
लगता
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Shadan Ahsan Marehrvi
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