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Jangveer Singh Rakesh
kaam ke bojh tale dab ga.e to samjhe ham
kaam ke bojh tale dab ga.e to samjhe ham | काम के बोझ तले दब गए तो समझे हम
- Jangveer Singh Rakesh
काम
के
बोझ
तले
दब
गए
तो
समझे
हम
लोग
क्यूँँ
चाह
के
भी
दिल
का
नहीं
कर
पाते
- Jangveer Singh Rakesh
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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सारे
ग़म
भूल
गए
आपके
रोने
पे
मुझे
किसको
ठंडक
में
पसीने
का
ख़्याल
आता
है
आखरी
उम्र
में
जाते
है
मदीने
हम
लोग
मरने
लगते
है
तो
जीने
का
ख़याल
आता
है
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Nadir Ariz
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क़ब्रों
में
नहीं
हम
को
किताबों
में
उतारो
हम
लोग
मोहब्बत
की
कहानी
में
मरे
हैं
Ajaz tawakkal
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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सब
की
हिम्मत
नहीं
ज़माने
में
लोग
डरते
हैं
मुस्कुराने
में
एक
लम्हा
भी
ख़र्च
होता
नहीं
मेरी
ख़ुशियों
को
आने
जाने
में
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Vishal Singh Tabish
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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तलब
करें
तो
ये
आँखें
भी
इन
को
दे
दूँ
मैं
मगर
ये
लोग
इन
आँखों
के
ख़्वाब
माँगते
हैं
Abbas rizvi
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क्या
लोग
हैं
कि
दिल
की
गिरह
खोलते
नहीं
आँखों
से
देखते
हैं
मगर
बोलते
नहीं
Akhtar Hoshiyarpuri
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कान्हा
होंगे
लोग
वहाँ
के
राधा
होंगी
बालाएँ
प्यार
की
बंसी
बजती
होगी
हर
समय
हर
ठाओं
रे
Ghaus Siwani
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आख़िरी
दुख
है
ज़िंदगी
का
दुख
ज़िंदगी
या'नी
बेबसी
का
दुख
हम
न
रोएँ
तो
और
रोए
कौन
शाख़
से
टूटी
हर
कली
का
दुख
और
बहुत
दुख
हैं
ज़िंदगी
में
दोस्त
तू
नहीं
मेरी
ज़िंदगी
का
दुख
मैं
किसी
पल
सा
देखता
हूँ
महज़
एक
बहती
हुई
नदी
का
दुख
कुछ
चराग़ों
ने
बाँट
रखा
है
दुनिया
की
सारी
तीरगी
का
दुख
एक
मुद्दत
से
रो
नहीं
पाया
आज
रोऊँगा
मैं
सभी
का
दुख
देखिए
मैं
जो
हूँ
बहुत
ख़ुश
हूँ
मुझ
को
मालूम
है
ख़ुशी
का
दुख
मैं
इधर
तड़पूँ
वो
उधर
तड़पे
यही
है
'वीर'
दिल-लगी
का
दुख
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Jangveer Singh Rakesh
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