bazahir jo himayat kar rahe hain | बज़ाहिर जो हिमायत कर रहे हैं

  - Shadan Ahsan Marehrvi
बज़ाहिरजोहिमायतकररहेहैं
वहीपीछेबग़ावतकररहेहैं
पताग़ैरोंसेयेमुझकोचलाहै
मेरेअपनेअदावतकररहेहैं
बहुतदिनबादलौटाहूँजोघरतो
तेरेतेवरशिकायतकररहेहैं
वहीपलकेंतुम्हारीकहरहीहैं
वहीगेसूशिकायतकररहेहैं
ख़ुदाकाशुक्रहैअच्छेसुख़नवर
मेरेशे'रोंपेहैरतकररहेहैं
बहुतहीएहतियातोंकोबरतना
मोहब्बतमेंनसीहतकररहेहैं
येसौदागरक़यामतसेडराकर
ख़ुदाकीअबतिजारतकररहेहैं
कोईहक़परहोतोसरकोकटाए
येनेज़ेफिरसेहसरतकररहेहैं
अमीर-ए-शहरकेक़िस्सेसुनाकर
नईनस्लोंकोग़ारतकररहेहैं
  - Shadan Ahsan Marehrvi
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