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Shadan Ahsan Marehrvi
ye jo ulfat hai ik qayaamat hai
ye jo ulfat hai ik qayaamat hai | ये जो उल्फ़त है इक क़यामत है
- Shadan Ahsan Marehrvi
ये
जो
उल्फ़त
है
इक
क़यामत
है
और
बंदा
है
तू
ख़ुदा
वाला
- Shadan Ahsan Marehrvi
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हम
नहीं
वो
जो
करें
ख़ून
का
दावा
तुझ
पर
बल्कि
पूछेगा
ख़ुदा
भी
तो
मुकर
जाएँगे
Sheikh Ibrahim Zauq
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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कितनी
सराहत
से
ख़ुदा
ने
की
तिरी
कारीगरी
शफ़्फ़ाफ़
शीशे
को
तराशा,
हूर
का
पैकर
दिया
Aditya Pandey
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सर
झुकाओगे
तो
पत्थर
देवता
हो
जाएगा
इतना
मत
चाहो
उसे
वो
बे-वफ़ा
हो
जाएगा
Bashir Badr
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मिरे
गुनाह
की
मुझ
को
सज़ा
नहीं
देता
मिरा
ख़ुदा
कहीं
नाराज़
तो
नहीं
मुझ
से
Shahid Zaki
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माँ
बाप
और
उस्ताद
सब
हैं
ख़ुदा
की
रहमत
है
रोक-टोक
उन
की
हक़
में
तुम्हारे
नेमत
Altaf Hussain Hali
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मेरी
दु'आ
है
और
इक
तरह
से
बद्दुआ
भी
है
ख़ुदा
तुम्हें
तुम्हारे
जैसी
बेटियाँ
अता
करे
Tehzeeb Hafi
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आसमाँ
में
है
ख़ुदा,
क्या
सब
दुआएंँ
आसमाँ
तक
जा
रही
हैं
मेरी
इक
फ़रयाद
पूरी
हो
तो
मैं
मानूँ
वहाँ
तक
जा
रही
हैं
Saahir
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या
तो
भरम
बना
रहे
इतना
ख़ुदा
करे
इनकार
अपने
होने
से
वरना
ख़ुदा
करे
मुश्किल
है
मेरा
काम
तो
मिल
बाँटकर
करें
आधा
करा
दें
राम
जी
आधा
ख़ुदा
करे
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Vineet Aashna
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किसी
के
तुम
हो
किसी
का
ख़ुदा
है
दुनिया
में
मेरे
नसीब
में
तुम
भी
नहीं
ख़ुदा
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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याद
कर
कर
के
आहें
भरते
हैं
उनके
कूचे
से
जब
गुज़रते
हैं
इश्क़
तो
आप
ही
से
करते
हैं
फिर
भी
इज़हार
से
वो
डरते
हैं
ज़ख़्म-ए-उल्फ़त
मगर
नहीं
भरते
चारा-गर
तो
इलाज
करते
हैं
आइना
उन
में
डूब
जाता
है
आइने
में
जो
वो
सँवरते
हैं
मेरी
फितरत
में
है
वफ़ादारी
और
मुझ
सेे
गिला
वो
करते
हैं
इश्क़
में
हाए
है
अजब
हालत
ज़िंदा
रहकर
भी
रोज़
मरते
हैं
रू-ब-रू
जब
भी
हम
नहीं
होते
उनके
गेसू
कहाँ
सँवरते
हैं
हम
मुसाफ़िर
हैं
राह-ए-उल्फ़त
के
रास्तो
में
कहाँ
ठहरते
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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रंज-ओ-ग़म
जिन
में
मुब्तला
था
दिल
उनकी
तफ़्तीश
कर
रहा
हूँ
मैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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गरेबाँ
चाक
अपना
सी
रहे
हैं
मगर
शर्तों
पे
अपनी
जी
रहे
हैं
ख़लिश
ऐसी
है
फुरक़त
में
तुम्हारी
मुसलसल
रात
से
हम
पी
रहे
हैं
नया
इक
दौर
है
आगे
हमारे
गुज़िश्ता
दौर
में
हम
जी
रहे
हैं
मोहब्बत
के
सितम
सब
ज़ब्त
करके
लबों
को
आप
अपने
सी
रहे
हैं
अगर
हो
रिन्द
तो
अंदर
बुला
लो
हो
गर
जो
शेख़
कहना
पी
रहे
हैं
बने
हैं
आबरू
अब
जो
तुम्हारी
कभी
पहलू
में
मेरे
भी
रहे
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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बदगुमाँ
जो
हों
उन
सेे
कह
देना
तुमको
रानी
बना
के
रक्खूँगा
Shadan Ahsan Marehrvi
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