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Shadan Ahsan Marehrvi
yaad kar kar ke aahen bharte hain
yaad kar kar ke aahen bharte hain | याद कर कर के आहें भरते हैं
- Shadan Ahsan Marehrvi
याद
कर
कर
के
आहें
भरते
हैं
उनके
कूचे
से
जब
गुज़रते
हैं
इश्क़
तो
आप
ही
से
करते
हैं
फिर
भी
इज़हार
से
वो
डरते
हैं
ज़ख़्म-ए-उल्फ़त
मगर
नहीं
भरते
चारा-गर
तो
इलाज
करते
हैं
आइना
उन
में
डूब
जाता
है
आइने
में
जो
वो
सँवरते
हैं
मेरी
फितरत
में
है
वफ़ादारी
और
मुझ
सेे
गिला
वो
करते
हैं
इश्क़
में
हाए
है
अजब
हालत
ज़िंदा
रहकर
भी
रोज़
मरते
हैं
रू-ब-रू
जब
भी
हम
नहीं
होते
उनके
गेसू
कहाँ
सँवरते
हैं
हम
मुसाफ़िर
हैं
राह-ए-उल्फ़त
के
रास्तो
में
कहाँ
ठहरते
हैं
- Shadan Ahsan Marehrvi
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चलो
करके
देखेंगे
इज़हार
अब
की
मुहब्बत
न
होगी
अदावत
तो
होगी
Tiwari Jitendra
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बस
मोहब्बत
बस
मोहब्बत
बस
मोहब्बत
जान-ए-
मन
बाक़ी
सब
जज़्बात
का
इज़हार
कम
कर
दीजिए
Farhat Ehsaas
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मसअला
ये
नहीं
कि
इश्क़
हुआ
है
हम
को
मसअला
ये
है
कि
इज़हार
किया
जाना
है
Rajesh Reddy
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अँगूठी
के
लिए
पैसा
नहीं
था
किया
इज़हार
हमने
शे'र
से
ही
Tanoj Dadhich
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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इज़हार
पे
भारी
है
ख़मोशी
का
तकल्लुम
हर्फ़ों
की
ज़बाँ
और
है
आँखों
की
ज़बाँ
और
Haneef akhgar
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अपने
इश्क़
का
यूँँ
इज़हार
करना
है
तुझ
सेे
तुझको
हाथों
से
पहनाएँगें
कानों
में
झुमके
Harsh saxena
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उसको
चाहा
और
चाहत
पर
क़ायम
हैं
पर
अफ़सोस
के
हम
इज़हार
नहीं
कर
सकते
Shadab Asghar
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हम
उनके
निकाले
हुए
लोगों
में
हैं
शामिल
हर
हाल
में
जीने
का
सलीक़ा
हमें
मालूम
वो
फूल
जो
तोड़े
गए
इज़हार
की
ख़ातिर
आते
हुए
किस
किस
ने
है
रौंदा
हमें
मालूम
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Amrendra Vishwakarma
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है
समझना
आपको
तो
शे'र
से
इज़हार
समझें
बात
कहने
को
भला
हम
फूल
क्यूँ
तोड़ा
करेंगे
Ankit Maurya
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ज़िन्दगी
क्या
है
एक
सदमा
है
जी
का
जंजाल
है
तुम्हारे
बिन
Shadan Ahsan Marehrvi
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तुझ
को
पाने
की
जुस्तुजू
में
फिर
और
इक
साल
राएगाँ
निकला
Shadan Ahsan Marehrvi
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इक
कसक
दिल
में
कहीं
उठती
है
बेसबब
शे'र
नहीं
होता
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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अब
तो
घर
मुझको
घर
नहीं
लगता
दिल
मेरा
इक
पहर
नहीं
लगता
ज़िन्दगी
अब
सज़ा
सी
लगती
है
मौत
से
भी
तो
डर
नहीं
लगता
छोड़
कर
जबसे
तुम
गए
मुर्शिद
अच्छा
अब
रहगुज़र
नहीं
लगता
कैसे
मुमकिन
हो
लौट
आओ
तुम
रेत
में
तो
शजर
नहीं
लगता
वो
जो
इक
पेड़
था
हरा
उस
में
कोई
भी
अब
समर
नहीं
लगता
क़ैदख़ाना
है
घर
तुमारे
बिन
घर
ज़रा
सा
भी
घर
नहीं
लगता
मुन्तक़िल
जब
से
हो
गए
हो
तुम
दिल
हमारा
इधर
नहीं
लगता
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Shadan Ahsan Marehrvi
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ये
जो
उल्फ़त
है
इक
क़यामत
है
और
बंदा
है
तू
ख़ुदा
वाला
Shadan Ahsan Marehrvi
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