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Tiwari Jitendra
chalo karke dekhenge izhaar ab ki
chalo karke dekhenge izhaar ab ki | चलो करके देखेंगे इज़हार अब की
- Tiwari Jitendra
चलो
करके
देखेंगे
इज़हार
अब
की
मुहब्बत
न
होगी
अदावत
तो
होगी
- Tiwari Jitendra
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अपने
इश्क़
का
यूँँ
इज़हार
करना
है
तुझ
सेे
तुझको
हाथों
से
पहनाएँगें
कानों
में
झुमके
Harsh saxena
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तूने
जिस
बात
को
इज़हार-ए-मुहब्बत
समझा
बात
करने
को
बस
इक
बात
रखी
थी
हमने
Ameer Imam
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जब
किया
इज़हार
तो
हंँस
कर
मुझे
कहने
लगी
प्यार
से
दो
बात
करना
प्यार
हो
जाता
है
क्या
Dipendra Singh 'Raaz'
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बैठा
हूँ
अभी
सामने
और
सोच
रहा
हूँ
इज़हार
पे
मेरे
भला
क्या
मेरा
बनेगा
Afzal Ali Afzal
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हम
उनके
निकाले
हुए
लोगों
में
हैं
शामिल
हर
हाल
में
जीने
का
सलीक़ा
हमें
मालूम
वो
फूल
जो
तोड़े
गए
इज़हार
की
ख़ातिर
आते
हुए
किस
किस
ने
है
रौंदा
हमें
मालूम
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Amrendra Vishwakarma
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हाए!
इज़हार
करके
पछताए
उसको
इक
दोस्त
की
ज़रूरत
थी
Kumar Vikas
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मैं
ने
पूछा
था
कि
इज़हार
नहीं
हो
सकता
दिल
पुकारा
कि
ख़बर-दार
नहीं
हो
सकता
Abbas Tabish
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अँगूठी
के
लिए
पैसा
नहीं
था
किया
इज़हार
हमने
शे'र
से
ही
Tanoj Dadhich
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दिल
की
बातें
दूसरों
से
मत
कहो
लुट
जाओगे
आज
कल
इज़हार
के
धंधे
में
है
घाटा
बहुत
Shuja Khawar
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इज़हार
करते
रहते
हैं
वैसे
तो
कितने
लोग
अच्छा
लगेगा
पर
मुझे
तेरी
ज़ुबान
से
Ankit Maurya
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दूर
से
यूँँ
न
मुस्कुराओ
तुम
लोग
दीवाने
होते
जाते
है
Tiwari Jitendra
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प्यार
जिसके
क़रीब
होता
है
वो
बड़ा
बद
नसीब
होता
है
आज
कल
दौर
कुछ
नया
है
क्या
इस
में
सबका
रक़ीब
होता
है
दर्द
अपना
कहा
नहीं
जाता
प्यार
में
ग़म
तबीब
होता
है
फूल
खिलते
फ़लक
बरस
उठता
जब
कभी
वो
क़रीब
होता
है
जो
मुहब्बत
यहाँ
नहीं
करता
शख़्स
वो
भी
अजीब
होता
है
जो
'तिवारी'
समझ
नहीं
सकता
आदमी
वो
नजीब
होता
है
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Tiwari Jitendra
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सियासत
में
न
उलझो
तुम
अभी
ठहरो
अमन
फ़ैला
रहे
सरकार
रहने
दो
Tiwari Jitendra
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हुस्न
तो
आइने
बताते
हैं
चाँद
तारों
के
साथ
आते
हैं
दूर
वाले
तो
दूर
बैठे
हैं
पास
वाले
अज़ाब
लाते
हैं
काम
के
पर
नहीं
बचे
जिनके
वो
परिंदे
ही
घर
बनाते
हैं
प्यार
को
खेल
मान
बैठे
हैं
खेलते
और
भूल
जाते
हैं
आप
जैसी
है
यार
लड़की
वो
हम
जिसे
दोस्त
कह
बुलाते
हैं
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Tiwari Jitendra
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प्यार
होते
ज़ात
आगे
बढ़
गई
है
इस
तरह
बारात
आगे
बढ़
गई
है
गाल
चूमा
और
फिर
जा
हाथ
पकड़ा
दोस्त
कह
कर
बात
आगे
बढ़
गई
है
ख़्वाब
ने
आँखों
पे
पहरा
कर
लिया
है
देख
उसको
रात
आगे
बढ़
गई
है
चाँद
को
बादल
ने
जा
कर
छू
लिया
है
इस
तरह
बरसात
आगे
बढ़
गई
है
जीत
को
सीने
लगाते
कुछ
हुआ
यूँँ
अब
हया
से
मात
आगे
बढ़
गई
है
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Tiwari Jitendra
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