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Shadan Ahsan Marehrvi
andhere aur kaale ho ga.e hain
andhere aur kaale ho ga.e hain | अँधेरे और काले हो गए हैं
- Shadan Ahsan Marehrvi
अँधेरे
और
काले
हो
गए
हैं
मेरे
दुश्मन
उजाले
हो
गए
हैं
चमन
को
छोड़कर
जब
से
गए
हो
हरे
पत्ते
भी
काले
हो
गए
हैं
तेरी
चाहत
में
पढ़कर
सब
बिरागी
मोहब्बत
करने
वाले
हो
गए
हैं
बहुत
लागत
ग़ज़ल
में
लग
रही
है
के
अब
रोटी
के
लाले
हो
गए
हैं
ज़रा
सा
जो
हुआ
बेख़ुद
तो
मेरे
मुख़ालिफ़
होश
वाले
हो
गए
हैं
करम
की
जिस
सेे
की
हमने
गुज़ारिश
वो
बादल
और
काले
हो
गए
हैं
तेरी
ही
हिज्र
की
वीरानियों
से
मेरे
कमरे
में
जाले
हो
गए
हैं
- Shadan Ahsan Marehrvi
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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फूल
ही
फूल
याद
आते
हैं
आप
जब
जब
भी
मुस्कुराते
हैं
Sajid Premi
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वक़्त
किस
तेज़ी
से
गुज़रा
रोज़-मर्रा
में
'मुनीर'
आज
कल
होता
गया
और
दिन
हवा
होते
गए
Muneer Niyazi
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नहीं
आबो
हवा
में
ताज़गी
अब
दवा
की
सीसियों
में
ज़िन्दगी
है
Umesh Maurya
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पहले
पानी
को
और
हवा
को
बचाओ
ये
बचा
लो
तो
फिर
ख़ुदा
को
बचाओ
Swapnil Tiwari
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मुहब्बत
के
समुंदर
की
कलाकारी
ग़ज़ब
की
है
कि
सब
कुछ
डूब
जाता
है
मगर
तर
कुछ
नहीं
होता
Muntazir Firozabadi
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सब
दुखों
का
ये
समुंदर
पार
होगा
जब,
सभी
आफ़तों
के
पत्थरों
पर
नाम
होगा
राम
का
Shoonya Shrey
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ईद
पर
सब
फूल
लेकर
आ
रहे
हैं
हो
गए
हैं
ज़िंदगी
के
ख़त्म
रमज़ान
Aves Sayyad
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उड़ाने
पर
जो
आ
जाऊँ
उड़ा
दूँ
होश
दुनिया
के
मगर
मैं
फूल
से
तितली
उड़ा
सकता
नहीं
यारों
Divy Kamaldhwaj
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प्यार
की
जोत
से
घर
घर
है
चराग़ाँ
वर्ना
एक
भी
शम्अ
न
रौशन
हो
हवा
के
डर
से
Shakeb Jalali
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रंग
दिल
पर
वही
है
चाहत
का
इश्क़
दोनों
तरफ़
बराबर
है
देख
तेरे
फ़िराक़
में
जानाँ
किस
तरह
कट
रहा
दिसम्बर
है
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Shadan Ahsan Marehrvi
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देख
तेरे
फ़िराक़
में
जाना
किस
तरह
कट
रहा
दिसम्बर
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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लोग
जब
मुस्कुरा
के
मिलते
हैं
कफ़
में
ख़ंजर
छुपा
के
मिलते
हैं
कैसी
सूरत
बना
के
मिलते
हैं
कई
चेहरे
लगा
के
मिलते
हैं
हिज्र
में
उनके
कैसी
गरमाइश
सर्द
झोंके
हवा
के
मिलते
हैं
और
माज़ी
में
कुछ
नहीं
मिलता
चंद
वादे
वफ़ा
के
मिलते
हैं
जल
चुकी
बस्तियों
की
साज़िश
में
कुछ
इरादे
हवा
के
मिलते
हैं
बाद
मुद्दत
बहार
आती
है
पहले
मौसम
ख़ला
के
मिलते
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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दश्त
दरिया
दिखाई
देता
है
आब
सहरा
दिखाई
देता
है
देखता
हूँ
जो
चाँद
को
तककर
तेरा
चेहरा
दिखाई
देता
है
अब
तो
हर
मोड़
तेरे
कूँचे
को
मुझ
को
जाता
दिखाई
देता
है
तुझ
को
देखा
न
तूर
पर
मैंने
सिर्फ़
मूसा
दिखाई
देता
है
तेरे
आगे
तो
अब
मुझे
जाना
चाँद
मैला
दिखाई
देता
है
हिज्र
में
ढल
के
तू
भी
तो
वाइज़
मेरे
जैसा
दिखाई
देता
है
दश्त
में
फिरते
ढ़ोकरें
खाता
सिर्फ़
राँझा
दिखाई
देता
है
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Shadan Ahsan Marehrvi
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मुश्किलों
में
क़रार
की
सूरत
कोई
निकले
बहार
की
सूरत
तू
जो
रूठा
है
तो
चमन
में
अब
गुल
भी
निकले
हैं
ख़ार
की
सूरत
रुख़
से
पर्दा
हटा
सबा
उसके
मुझको
दिखला
दे
यार
की
सूरत
मुस्कुरा
कर
किया
सितम
मुझ
पर
उसने
बदली
न
वार
की
सूरत
जब
दवा
कोई
भी
असर
न
करे
काम
करती
है
यार
की
सूरत
बाज़ी-ए-इश्क़
जीत
कर
ज़ाहिद
मैंने
देखी
है
हार
की
सूरत
सूरत-ए-हाल
हैं
मेरे
जैसे
है
वही
ग़मगुसार
की
सूरत
गुल
से
हटती
नहीं
नज़र
शादान
कौन
देखे
है
ख़ार
की
सूरत
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Shadan Ahsan Marehrvi
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