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Shadan Ahsan Marehrvi
rang dil par vahii hai chaahat ka
rang dil par vahii hai chaahat ka | रंग दिल पर वही है चाहत का
- Shadan Ahsan Marehrvi
रंग
दिल
पर
वही
है
चाहत
का
इश्क़
दोनों
तरफ़
बराबर
है
देख
तेरे
फ़िराक़
में
जानाँ
किस
तरह
कट
रहा
दिसम्बर
है
- Shadan Ahsan Marehrvi
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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मुझे
पहले
पहल
लगता
था
ज़ाती
मसअला
है
मैं
फिर
समझा
मोहब्बत
क़ायनाती
मसअला
है
परिंदे
क़ैद
हैं
तुम
चहचहाहट
चाहते
हो
तुम्हें
तो
अच्छा
ख़ासा
नफ़सयाती
मसअला
है
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Umair Najmi
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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प्यार-मोहब्बत
सीधे-सादे
रस्ते
हैं
कोई
इन
पर
चलने
को
तैयार
नहीं
Ashok Rawat
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मोहब्बत
करने
वाले
कम
न
होंगे
तिरी
महफ़िल
में
लेकिन
हम
न
होंगे
Hafeez Hoshiarpuri
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मज़ा
चहिए
जो
आख़िर
तक
उदासी
से
मोहब्बत
कर
ख़ुशी
का
क्या
है
कब
तब्दील
है
से
थी
में
हो
जाए
Atul K Rai
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बस
मोहब्बत
बस
मोहब्बत
बस
मोहब्बत
जान-ए-
मन
बाक़ी
सब
जज़्बात
का
इज़हार
कम
कर
दीजिए
Farhat Ehsaas
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इश्क़
में
तेरे
गँवा
दी
ये
जवानी
जानेमन
हो
गई
दिलचस्प
अपनी
भी
कहानी
जानेमन
Tanoj Dadhich
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होगा
किसी
दीवार
के
साए
में
पड़ा
'मीर'
क्या
रब्त
मोहब्बत
से
उस
आराम-तलब
को
Meer Taqi Meer
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ज़िन्दा
होते
हैं
रोज़
मरते
हैं
लोग
पागल
हैं
इश्क़
करते
हैं
हमको
कहनी
है
उन
सेे
बात
वही
बात
कहते
सभी
जो
डरते
हैं
और
डरते
नहीं
किसी
शय
से
उनकी
नाराज़गी
से
डरते
हैं
गुफ़्तगू
उन
सेे
कैसे
की
जाए
बात
करते
हैं
फूल
झड़ते
हैं
डर
ख़ुदास
ज़रा
नहीं
लगता
हिज्र
की
वहशतों
से
डरते
हैं
रोज़
करते
हैं
वस्ल
के
वादे
रोज़
वादे
से
वो
मुकरते
हैं
साफ़
कहते
हैं
बात
हम
फिर
भी
आँखों
में
आपकी
अखरते
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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रहगुज़र
पर
चले
अदब
की
जो
उनको
रस्ते
से
ही
उतार
दिया
बुग्ज़
से
भरके
अपने
सीनों
को
हाए
तुमने
अदब
को
मार
दिया
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Shadan Ahsan Marehrvi
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दरमियाँ
फ़ासला
नहीं
होता
तू
अगर
बे-वफ़ा
नहीं
होता
साफ़
कहना
बुरा
नहीं
होता
मुझ
को
फिर
वसवसा
नहीं
होता
तुम
न
आते
अगर
गुलिस्ताँ
में
कोई
भी
गुल
खिला
नहीं
होता
ज़र्रे
ज़र्रे
में
है
ख़ुदा
पिन्हा
कोई
ज़र्रा
ख़ुदा
नहीं
होता
सच
तो
ये
है
कभी
बुराई
से
आदमी
का
भला
नहीं
होता
उन
किताबों
को
हम
नहीं
पढ़ते
जिन
में
ज़िक्र
आपका
नहीं
होता
मुद्दई
इश्क़
मर
भी
जाए
तो
इश्क़
का
खात्मा
नहीं
होता
मुद्दतों
शख़्स
जो
रहा
मुझ
में
उस
सेे
अब
राब्ता
नहीं
होता
तेरे
कूचे
से
जब
गुज़रता
हूँ
मुझको
अपना
पता
नहीं
होता
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Shadan Ahsan Marehrvi
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ज़िन्दगी
क्या
है
एक
सदमा
है
जी
का
जंजाल
है
तुम्हारे
बिन
Shadan Ahsan Marehrvi
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मयकदों
में
तो
आम
पीते
हैं
हम
निगाहों
से
जाम
पीते
हैं
तेरी
तस्वीर
सामने
रखकर
करके
तुझ
सेे
कलाम
पीते
हैं
ग़म-ए-फ़ुर्क़त
में
दो
ही
घूँट
फ़क़त
आप
करते
हैं
नाम
पीते
हैं
आओ
पी
लो
के
सुब्ह
सादिक़
है
आओ
बैठो
है
शाम
पीते
हैं
मैं
ज़माने
को
मय-कदे
सा
लगूँ
आओ
इस
तरह
जाम
पीते
हैं
क़ैद
बोतल
में
हैं
अजब
जलवे
आज
बोतल
तमाम
पीते
हैं
घिर
के
आईं
घटाएँ
सावन
की
कीजे
कुछ
इंतिज़ाम
पीते
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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