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Atul K Rai
mazaa chahiye jo aaKHir tak udaasi se mohabbat kar
mazaa chahiye jo aaKHir tak udaasi se mohabbat kar | मज़ा चहिए जो आख़िर तक उदासी से मोहब्बत कर
- Atul K Rai
मज़ा
चहिए
जो
आख़िर
तक
उदासी
से
मोहब्बत
कर
ख़ुशी
का
क्या
है
कब
तब्दील
है
से
थी
में
हो
जाए
- Atul K Rai
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ख़ुदा
की
क़सम
उस
ने
खाई
जो
आज
क़सम
है
ख़ुदा
की
मज़ा
आ
गया
Dagh Dehlvi
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मिरी
वफ़ा
का
तिरा
लुत्फ़
भी
जवाब
नहीं
मिरे
शबाब
की
क़ीमत
तिरा
शबाब
नहीं
Asrar Ul Haq Majaz
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तुमको
देखें
तो
देखते
जाएँ
देखने
का
अलग
मज़ा
है
तुम्हें
Pravin Rai
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ये
मज़ा
था
दिल-लगी
का
कि
बराबर
आग
लगती
न
तुझे
क़रार
होता
न
मुझे
क़रार
होता
Dagh Dehlvi
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वो
तो
सारी
आग
है
चाहे
जहाँ
से
चूम
लो,
हाँ
मगर
माथे
पे
बोसे
का
मज़ा
कुछ
और
है
Alankrat Srivastava
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दोस्तो
क्या
क्या
दिवाली
में
नशात-ओ-ऐश
है
सब
मुहय्या
है
जो
इस
हंगाम
के
शायाँ
है
शय
Nazeer Akbarabadi
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पलट
कर
लौट
आने
में
मज़ा
भी
है
मुहब्बत
भी
बुलाकर
देख
लो
शायद
पलट
कर
लौट
आएँ
हम
Gaurav Singh
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वो
अक़्ल-मंद
कभी
जोश
में
नहीं
आता
गले
तो
लगता
है
आग़ोश
में
नहीं
आता
Farhat Ehsaas
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भूले
हैं
रफ़्ता
रफ़्ता
उन्हें
मुद्दतों
में
हम
क़िस्तों
में
ख़ुद-कुशी
का
मज़ा
हम
से
पूछिए
Khumar Barabankvi
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ग़ुरूर-ए-लुत्फ़-ए-साक़ी
नश्शा-ए-बे-बाकी-ए-मस्ताँ
नम-ए-दामान-ए-इस्याँ
है
तरावत
मौज-ए-कौसर
की
Mirza Ghalib
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नये
घर
में
हवन
पूजन
करा
कर
कहाँ
जाता
है
कोई
खण्डहर
में!
Atul K Rai
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ये
कैसी
कश्मकश
है
कैसे
किसे
बतायें
रोना
भी
आ
रहा
है
रो
भी
न
पा
रहा
हूँ
Atul K Rai
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बीच
रस्ते
मुकर
गए
होते
साथ
जो
रहगुज़र
गए
होते
आपको
ख़ूब
जानते
हैं
हम
आप
होते
तो
मर
गए
होते
वक़्त
हमको
डरा
नहीं
पाता
वक़्त
रहते
जो
डर
गए
होते
एक
परिवार
ख़ुश
हुआ
होता
साँझ
ढलते
जो
घर
गए
होते
शब
मुहब्बत
जता
रही
होती
आप
जो
चूम
कर
गए
होते
चाँद
छत
पर
जो
आ
गया
होता
रौशनी
में
उतर
गए
होते
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Atul K Rai
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वक़्त
के
हाथों
ही
फिर
लुटना
पड़ा
देर
से
आया
वो
अंतिम
बार
भी
Atul K Rai
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दूल्हा
बनने
में
ही
जितना
वक़्त
लगे
वक़्त
नहीं
लगता
ससुराल
पहुँचने
में
Atul K Rai
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