gham men jo masarrat ke pahluu nikal aate hain | ग़म में जो मसर्रत के पहलू निकल आते हैं

  - Sabir Aarwi
ग़ममेंजोमसर्रतकेपहलूनिकलआतेहैं
हमलाखछुपातेहैंआँसूनिकलआतेहैं
मीआ'दबढ़ातेहैंवोक़ैद-ए-मोहब्बतकी
हमबचकेअसीरान-ए-गेसूनिकलआतेहैं
क्यारहरव-ए-हस्तीनेफिरराह-ए-तलबखोदी
क्यूँशबकेअंधेरेमेंजुगनूनिकलआतेहैं
जबभीतिरीज़ुल्फ़ोंकाचर्चाकहींहोताहै
तख़्ईलकेगोशेसेबा-मूनिकलआतेहैं
क्यूँबरबत-ए-दिलछेड़ेंज़ख़्मोंकेगुलिस्ताँमें
क्याजानिएक्यागुज़रेजादूनिकलआतेहैं
'साबिर'ग़म-ए-हस्तीमेंमायूसहोजाएँ
हरहालमेंजीनेकेपहलूनिकलआतेहैं
  - Sabir Aarwi
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