zulf-e-shab ka saaya bhi kis qadar ghanera hai | ज़ुल्फ़-ए-शब का साया भी किस क़दर घनेरा है

  - Sabir Aarwi
ज़ुल्फ़-ए-शबकासायाभीकिसक़दरघनेराहै
दिलसेउनकीमहफ़िलतकरास्ताअँधेराहै
आरिज़-ए-तबस्सुमपरग़ाज़ा-ए-तकल्लुफ़क्यूँ
मुस्कुराकेदेखोतोहरतरफ़सवेराहै
शाख़-ए-गुलसीबाहेंहोंयाख़ुनकहवाएँहों
ताइर-ए-तख़य्युलकाकबकहींबसेराहै
उनकानामजबलेंगेदिलज़रूरधड़केगा
उनकीयादकाजबतकमेरेदिलमेंडेराहै
दामन-ए-मोहब्बतमेंआँसूओंकेमोतीहैं
याचमनमेंशबनमनेलाल-ओ-ज़रबिखेराहै
तुममता-ए-ग़म'साबिर'जैसेहोबचालेना
रहज़नोंकीबस्तीहैडाकुओंकाडेराहै
  - Sabir Aarwi
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