hosh-o-khird se door hooñ sood-o-ziyaan se door | होश-ओ-ख़िरद से दूर हूँ सूद-ओ-ज़ियाँ से दूर

  - Saba Afghani
होश-ओ-ख़िरदसेदूरहूँसूद-ओ-ज़ियाँसेदूर
दीवानाहूँक़ुयूद-ए-रुसूम-ए-जहाँसेदूर
हद्द-ए-नज़रसेदूरज़मान-ओ-मकाँसेदूर
मंज़िलहैमेरेइश्क़कीफ़हम-ओ-गुमाँसेदूर
रंगीनी-ए-जमालसेसहराभीहैचमन
बैठाहूँगुल्सिताँमेंमगरगुल्सिताँसेदूर
येबे-ख़ुदी-ए-शौक़काआलमतोदेखिए
सज्देतोकररहाहूँमगरआस्ताँसेदूर
दिलभीवहीहैमैंभीवहीदर्दभीवही
लेकिनयेक्याकिलज़्ज़त-ए-सोज़-ए-निहाँसेदूर
शायदउसीकानामहैनाकामी-ए-मुराद
मंज़िलसेहूँक़रीबमगरकारवाँसेदूर
अफ़्साना-ए-हयातकोसमझोतो'सबा'
हरहर्फ़दास्ताँहैमगरदास्ताँसेदूर
  - Saba Afghani
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy