raaz hai bahut gahra baat ik zaraa si hai | राज़ है बहुत गहरा बात इक ज़रा सी है

  - Saba Afghani
राज़हैबहुतगहराबातइकज़रासीहै
वोमैंसामनेफिरभीचश्म-ए-शौक़प्यासीहै
ज़िंदगीभीबरहमहैमौतभीख़फ़ासीहै
आज-कलतोदोनोंमेंआपकीउदासीहै
अपनीअंजुमनसेहमयेकहाँचलेआए
हरतरफ़अँधेराहैहरतरफ़उदासीहै
दाग़-ए-दिलकोरौशनकरग़मकीरातहैलंबी
शम्अ'काभरोसाक्यामहभीबे-वफ़ासीहै
आपहज़रत-ए-वाइज़पहलेख़ुदकोपहचानें
क्यूँँकिख़ुद-शनासीहीवज्ह-ए-हक़-शनासीहै
जामइसलिएअपनाआँसुओंसेभरताहूँ
जिसनज़रसेपीताथाआजवोभीप्यासीहै
यूँँतोहिज्रकीरातेंरोज़हीगुज़रतीहैं
आज'सबा'लेकिनसुब्हसेउदासीहै
  - Saba Afghani
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