sawaari oont ki hai | सवारी ऊँट की है

  - Rafiq Sandelvi
सवारीऊँटकीहै
औरमैंशहर-ए-शिकस्ताकी
किसीसुनसाँगलीमेंसरझुकाए
हाथमेंबद-रंगचमड़ेकीमहारेंथामकर
उसघरकीजानिबजारहाहूँ
जिसकीचौखटपर
हज़ारोंसालसे
इकग़म-ज़दाऔरत
मिरेवादेकीरस्सी
रेशा-ए-दिलसेबुनी
मज़बूतरस्सीसेबंधीहै
आँसुओंसेतरनिगाहोंमें
किसीकोहनासितारेकीचमकलेकर
मिरेख़ाकिस्तरीमल्बूसकी
मख़्सूसख़ुश्बूसूँघनेको
औरभूरेनटकी
दुखसेलबालबबिलबिलाहट
सुननेकोतय्यारबैठीहै!
वहीसीलन-ज़दाऊताक़कागोशा
जहाँमैंएकशबउसको
लरज़तेसनसनातेज़हरवाले
चोबीतीरोंकीघनीबारिशमें
बे-बसऔरअकेलाछोड़आयाथा
मुझेसबयादहैक़िस्सा
बरसकरअब्रबिल्कुलथमचुकाथा
औरख़लामेंचाँद
यूँँलगताथाजैसे
तख़्तपरनौ-उम्रशहज़ादाहोकोई
यूँँहवाचेहरेकोमसकरकेगुज़रतीथी
किजैसेरेशमींकपड़ाहोकोई
अपनेठंडेऔरगीलेख़ोलकेअंदर
गलीसोईहुईथी
दम-ब-ख़ुदसारेमकाँ
ऐसेनज़रआतेथे
जैसेनर्मऔरबारीककाग़ज़केबनेहों
मोमकेतर्शेहुएहों
इकबड़ीतस्वीरमें
जैसेअज़लसेईस्तादाहों!
वहीसीलन-ज़दाऊताक़कागोशा
जहाँमहताबकीबुर्राक़किरनें
उसकेलांम्बेऔरखुलेबालोंमेंअड़से
ताज़ा-तरइंजीरकेपत्तेरौशनकररहीथीं
उसकीगहरीगंदुमींकुहनीकाबोसायादहैमुझको
नहींभूलाअभीतक
साराक़िस्सायादहैमुझको
उसीशब
मैंनेजबइकलम्हा-ए-पुर-सोज़में
तलवारउसकेपाँवमेंरखदीथी
औरफिरयेकहाथा:
''मेराव'अदाहै
येमेराजिस्मऔरइसजिस्मकीहाकिम
येमेरीबातिनीताक़त
क़यामतऔर
क़यामतसेभीआगे
सरहद-ए-इम्काँसेला-इम्कांतलक
तेरीवफ़ाकासाथदेगी
वक़्तसुनताहै
गवाहीकेलिए
आकाशपरयेचाँद
क़दमोंमेंपड़ीयेतेग़
औरबालोंमेंयेइंजीरकापत्ताहीकाफ़ीहै!''
ख़ुदावंदावोकैसामरहलाथा!
अबयेकैसामरहलाहै!
एकसुनसानीकाआलमहै
गलीचुपहै
किसीज़ी-रूहकीआहटनहींआती
येकैसीसाअत-ए-मनहूसहै
जिसमेंअभीतक
कोईनन्हासापरिंदायापतिंगा
याकोईमौहूमच्यूँँटीहीनहींगुज़री
किसीभीमर्दज़नकी
मैंनेसूरतहीनहींदेखी
सवारीऊँटकीहै
औरमैंशहर-ए-शिकस्ताकी
किसीसुनसाँगलीमेंसरझुकाए
हाथमेंबद-रंगचमड़ेकीमहारेंथामकर
उसघरकीजानिबजारहाहूँ
याकिसीमहशर
ख़मोशीकेकिसीमहशरकीजानिबजारहाहूँ
हिचकियोंऔरसिसकियोंकेब'अदकामहशर
कोईमंज़र
कोईमंज़रकिजिसमेंइकगलीहै
एकभूराऊँटहै
औरएकबुज़दिलशख़्सकीढीलीरिफ़ाक़तहै
सफ़रना-मुख़्ततम
जैसेअबदतककीकोईलंबीमसाफ़तहै!
सवारीऊँटकी
याकाठकेआसाबकीहै
आज़माइशइकअनोखेख़्वाबकीहै
पुतलियाँसाकितहैं
सायाऊँटकाहिलतानहीं
आईना-ए-आसारमें
सारीशबीहेंगुमहुईहैं
उसकेहोनेकानिशाँमिलतानहीं
कबसेगलीमेंहूँ
कहाँहैवोमिरीप्यारी
मिरीसीलन-ज़दाऊताक़वाली
वोसुरीलीघंटियोंवाली
ज़मीनोंपानियोंऔरअन्फ़ुसआफ़ाक़वाली
किसक़दरआँखोंनेकोशिशकी
मगररोनानहींआता
सबबक्याहै
गलीकाआख़िरीकोनानहींआता
गलीकोहुक्महोअबख़त्महोजाए
मैंभूरेऔरबूढ़ेऊँटपरबैठेहुए
पीरीकेदिनगिनताहूँ
शायदइसगलीमेंरहनेवाला
कोईउसकेअहदकाज़ंबूरहीगुज़रे
मैंउसकीबारगहमें
दस्त-बस्तामाज़रतकीभीकमाँगूँ
सरनदामतसेझुकाऊं
औरउसज़ंबूरकेसदक़े
किसीदिनअपनेबूढ़ेजिस्मको
औरऊँटकोलेकर
गलीकीआख़िरीहदपारकरजाऊँ!!
  - Rafiq Sandelvi
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