mitati hui tahzeeb se nafrat na kiya kar | मिटती हुई तहज़ीब से नफ़रत न किया कर

  - Rafiq Sandelvi
मिटतीहुईतहज़ीबसेनफ़रतकियाकर
चौपालपेबूढ़ोंकीकहानीभीसुनाकर
मालूमहुआहैयेपरिंदोंकीज़बानी
थमजाएगातूफ़ानदरख़्तोंकोगिराकर
पीतलकेकटोरेभीनहींअपनेघरोंमें
ख़ैरातमेंचाँदीकातक़ाज़ाकियाकर
मुमकिनहैगरेबानोंमेंख़ंजरभीछुपेहों
तूशहर-ए-अमाँमेंभीबे-ख़ौफ़फिराकर
माँगेहुएसूरजसेतोबेहतरहैअँधेरा
तूमेरेलिएअपनेख़ुदासदु'आकर
तहरीरकायेआख़िरीरिश्ताभीगयाटूट
तन्हाहूँमैंकितनातिरेमक्तूबजलाकर
आतीहैंअगररातकोरोनेकीसदाएँ
हम-साएकाअहवालकभीपूछलियाकर
वोक़हत-ए-ज़ियाहैकिमिरेशहरकेकुछलोग
जुगनूकोलिएफिरतेहैंमुट्ठीमेंदबाकर
  - Rafiq Sandelvi
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