sehar tak us pahaadi ke aqab men ro ke aata hooñ | सहर तक उस पहाड़ी के अक़ब में रो के आता हूँ

  - Rafiq Sandelvi
सहरतकउसपहाड़ीकेअक़बमेंरोकेआताहूँ
मैंनुक़्ता-हा-ए-गिर्यापरइकट्ठाहोकेआताहूँ
उधररस्तेमेंचौथेकोसपरतालाबपड़ताहै
मैंख़ाकऔरख़ूनसेलुथड़ीरिकाबेंधोकेआताहूँ
यहाँइकदश्तमेंफ़िरऔनकाअहरामबनताहै
मैंअपनीपुश्तपरचौकोरपत्थरढोकेआताहूँ
अभीकुछबाज़याबीकाअमलमाकूसलगताहै
मैंजबभीढूँडनेजाताहूँख़ुदकोखोकेआताहूँ
जहाँपरछाईंतकपड़तीनहींहैख़ाक-ज़ादोंकी
उसीख़ालीकुरेपरसातमौसमसोकेआताहूँ
  - Rafiq Sandelvi
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