kisi din aa | किसी दिन आ

  - Rafiq Sandelvi
किसीदिन
पुरानीखाईयोंकोपारकरके
दलदलोंमेंपाँवरक्खें
नर्सलोंकोकाटडालें
पेश-ए-मंज़रकेलिएरस्ताबनाएँ
किसीदिन
धुँदमेंजकड़ीहुई
काँटोंभरीयेबाड़
जिसमेंवक़्तकीबिजलीरवाँहै
जोज़मींआसमाँको
काटतीहै
बीचसे
उसकोहटाएँ
किसीदिन
झूलतेपुलसेउतरकर
नक़्शा-ए-तक़वीममें
पुर-पेचकोहसारोंकेअंदर
झागउड़ाती
शोरकरती
बलपेबलखातीनदीमें
ग़ोता-ज़नहों
तैरतेजाएँ!
किसीदिन
बड़ाचक्करलगाएँ!!
  - Rafiq Sandelvi
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