bhool jaate hain taqaddus ke haseen pal kitne | भूल जाते हैं तक़द्दुस के हसीं पल कितने

  - Rafia Shabnam Abidi
भूलजातेहैंतक़द्दुसकेहसींपलकितने
लोगजज़्बातमेंहोजातेहैंपागलकितने
रोज़ख़ुश्बूकेमुक़द्दरमेंरहीख़ुद-सोज़ी
अपनीहीआगमेंजलतेरहेसंदलकितने
सब्ज़मौसमयहाँफिरसेपलटकरआया
होगएज़र्दमिरेगाँवकेपीपलकितने
ख़ुद-कुशीक़त्ल-ए-अनातर्क-ए-तमन्नाबैराग
ज़िंदगीतेरेनज़रआनेलगेहलकितने
बारिशेंहोतीहैंजिसवक़्तभरीआँखोंकी
राखहोजातेहैंजलतेहुएआँचलकितने
हरक़दमकोईदरिंदाकोईखूँ-ख़्वारउक़ाब
शहरकीगोदमेंआबादहैंजंगलकितने
बे-रुख़ीउसकीरुलाएगीलहूक्या'शबनम'
ज़ख़्मखातेहीरहेहमतोमुसलसलकितने
  - Rafia Shabnam Abidi
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