roz uthata hai dhuaan koh-e-nida ke us paar | रोज़ उठता है धुआँ कोह-ए-निदा के उस पार

  - Rafia Shabnam Abidi
रोज़उठताहैधुआँकोह-ए-निदाकेउसपार
चाँदचुप-चापसुलगताहैफ़ज़ाकेउसपार
भीगजातीहैयेमासूमसीधरतीहरसुब्ह
कौनरोताहैबताओतोघटाकेउसपार
सरहद-ए-जिस्मसेआगेहद-ए-इम्काँसेपरे
शहर-ए-जाँरहताहैदीवार-ए-अनाकेउसपार
नेकियाँबाँटतेरहनेकीसज़ालाज़िमहै
पारापाराहैबदनकू-ए-जज़ाकेउसपार
मैंकिमंजधारमेंहूँकौननिकाले'शबनम'
छुपगयावोतोकहींमुझकोबुलाकेउसपार
  - Rafia Shabnam Abidi
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