jis ki khaatir umr ganwaai ik duniya ko bhooli main | जिस की ख़ातिर उम्र गँवाई इक दुनिया को भूली मैं

  - Rafia Shabnam Abidi
जिसकीख़ातिरउम्रगँवाईइकदुनियाकोभूलीमैं
जीकहताथाउससेकहदूँलेकिनकैसेकहतीमैं
मेरीज़ातकाजिसकीनज़रसेइतनागहरारिश्ताहै
उसकीआँखसमुंदरजैसीहरी-भरीइकधरतीहै
बंदकिवाड़ोंपरइकजानीपहचानीदस्तकजोसुनी
यूँँहीडूपट्टाछोड़केभागीनंगेपाँवहीपगलीमैं
किसकाचेहरादेखलियाथासोतेसोतेबचपनमें
ख़्वाबोंकीख़ुश-रंगनदीमेंबरसोंडूबीउभरीमें
सबसेबड़ायेजुर्मथामेराइसीलिएबदनामहुई
सारीदुनियाजहाँगिरीथीउसीमोड़परसंभलीमैं
येभीसचहैऐसेकबतकमिल-जुलकरचलसकतेथे
कुछतोवोभीथाहरजाईथोड़ीसीथीज़िद्दीमैं
यूँँहीशायदजातेजातेउसनेइधरभीदेखाहो
जाड़ोंकामौसमथालेकिनसरसेपातकभीगीमैं
मेरेलिएतोजीनेकायेएकसहाराकाफ़ीहै
कोईचाहेकुछभीकहलेतेरीनज़रमेंअच्छीमैं
मेरीमजबूरीने'शबनम'जिसकोबद-ज़नकरडाला
उसकीक़समथीजानसेप्यारीझूटीकैसेखातीमैं
  - Rafia Shabnam Abidi
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