ek ik kar ke sabhi log bichhad jaate hain | एक इक कर के सभी लोग बिछड़ जाते हैं

  - Rafia Shabnam Abidi
एकइककरकेसभीलोगबिछड़जातेहैं
दिलकेजंगलयूँँहीबस्तेहैंउजड़जातेहैं
कैसेख़ुश-रंगहूँख़ुश-ज़ाएक़ाफलहूँलेकिन
वक़्तपरचक्खेनहींजाएँतोसड़जातेहैं
अपनेलफ़्ज़ोंकेतअस्सुरकाज़राध्यानरहे
हाकिम-ए-शहरकभीलोगभीउड़जातेहैं
रेततारीख़केसीनेमेंहटातेहैंवही
आबलेप्यासीज़बानोंमेंजोपड़जातेहैं
ऐसेकुछहाथभीहोतेहैंकिजिनकेकंगन
तोड़नेवालेकेएहसासमेंगड़जातेहैं
'शबनम'अंदाज़-ए-तकल्लुममेंकशिशलाज़िमहै
वर्नाअल्फ़ाज़सिमटतेहैंसिकड़जातेहैं
  - Rafia Shabnam Abidi
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