dilon men jazba-e-nafrat hai kya kiya jaa.e | दिलों में जज़्बा-ए-नफ़रत है क्या किया जाए

  - Rafi Badayuni
दिलोंमेंजज़्बा-ए-नफ़रतहैक्याकियाजाए
ज़बाँपेदा'वा-ए-उल्फ़तहैक्याकियाजाए
हज़ारक़िस्मकेइल्ज़ामसुनकेभीचुपहैं
हमाराजुर्मशराफ़तहैक्याकियाजाए
दुश्मनोंसेअदावतदोस्तोंकालिहाज़
इसीकानामसदाक़तहैक्याकियाजाए
हमारेसीनेमेंपत्थरनहींहैलोगों
हमेंभीपास-ए-मोहब्बतहैक्याकियाजाए
दूकान-ए-इल्म-ओ-हुनरक्यूँसजालेकोई
येराज़-ए-इज़्ज़त-ओ-शोहरतहैक्याकियाजाए
येइकख़लिशयेतजस्सुसयेहसरतोंकाहुजूम
इसीसेज़ीस्तइबारतहैक्याकियाजाए
बदलकेदेखेभीउस्लूबतिश्नगीगई
दिल-ओ-नज़रकीहिकायतहैक्याकियाजाए
मैंख़ुदख़ुलूससेअपनेबहुतपरेशाँहूँ
अबइसकीकिसकोज़रूरतहैक्याकियाजाए
ज़माना-साज़ीकोदुनियाहुनरकहेलेकिन
जबइसख़यालसेनफ़रतहैक्याकियाजाए
  - Rafi Badayuni
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