jazba-e-haqq-o-sadaqat ko dabaaein kaise | जज़्बा-ए-हक़्क़-ओ-सदाक़त को दबाएँ कैसे

  - Rafi Badayuni
जज़्बा-ए-हक़्क़-ओ-सदाक़तकोदबाएँकैसे
बातबनजाएमगरबातबनाएँकैसे
अपनीरूदाद-ए-ग़म-ए-इश्क़सुनाएँकैसे
उनसेवाबस्ताहैंहालातबताएँकैसे
लोगचेहरेसेसमझलेतेहैंदिलकीहालत
अबतिराराज़छुपाएँतोछुपाएँकैसे
हुस्नतोआजभीदामन-कश-ए-दिलहैलेकिन
अपनेहालातकोहमभूलभीजाएँकैसे
ग़ैरमुमकिनहैअंधेरेमेंतलाश-ए-मंज़िल
रौशनीकुछतोमिलेरास्तापाएँकैसे
ने'मत-ए-दर्दकभीलज़्ज़त-ए-ग़मबख़्शीहै
उनकेएहसानभलाभूलभीजाएँकैसे
बार-ए-ग़मकीभीकोईहदहैज़मानेवालो
रोज़-अफ़्ज़ूँहोतोयेबारउठाएँकैसे
  - Rafi Badayuni
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