nafi ko karyaa-e-isbaat se nikaalta hooñ | नफ़ी को कर्या-ए-इस्बात से निकालता हूँ

  - Qamar Raza Shahzad
नफ़ीकोकर्या-ए-इस्बातसेनिकालताहूँ
मैंअपनीज़ाततिरीज़ातसेनिकालताहूँ
कशीदकरताहूँमैंदिनकीआगसेठंडक
औरअपनीधूपकहींरातसेनिकालताहूँ
तूएकरुख़पेहैमहव-ए-कलामलेकिनमैं
कईमआ'नीतिरीबातसेनिकालताहूँ
दु'आकेहालेबनाकरतिरेजमालकेगिर्द
तुझेमैंगर्दिश-ओ-आफ़ातसेनिकालताहूँ
मिराकमालमैंअपनीबुलंदियाँ'शहज़ाद'
हक़ीर-ओ-पस्तमक़ामातसेनिकालताहूँ
  - Qamar Raza Shahzad
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