na apne-aap ko is tarah dar-b-dar rakhte | न अपने-आप को इस तरह दर-ब-दर रखते

  - Qamar Raza Shahzad
अपने-आपकोइसतरहदर-ब-दररखते
पलटकेआतेअगरहमभीकोईघररखते
अजीबवहशत-ए-शबथीकिशामढलतेही
तमामलोगमुंडेरोंपरअपनेसररखते
जोअपनीफ़त्हकेनश्शेमेंचूरथेवोभला
सुलगतेशहरकेमंज़रपेक्यानज़ररखते
येऔरबातकिसरसब्ज़थेबहुतलेकिन
हमऐसेपेड़बनपाएजोसमररखते
जिन्हेंहवाकीरिफ़ाक़तअज़ीज़थी'शहज़ाद'
वोअपनेपाँवभलाक्याज़मीनपररखते
  - Qamar Raza Shahzad
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy