ham ne har gham dil-e-sad-chaak se baahar rakha | हम ने हर ग़म दिल-ए-सद-चाक से बाहर रक्खा

  - Qamar Raza Shahzad
हमनेहरग़मदिल-ए-सद-चाकसेबाहररक्खा
आगकोपैरहन-ए-ख़ाकसेबाहररक्खा
ज़ेब-ए-तनहमनेभीकररक्खीयेदुनियालेकिन
तेरेहररंगकोपोशाकसेबाहररक्खा
ख़्वाब-दर-ख़्वाबतुझेढूँडनेवालोंनेभीअब
नींदकोदीदा-ए-नमनाकसेबाहररक्खा
इकतरहध्यानहीऐसाकिजिसेहमनेयहाँ
नफ़अ'नुक़सानकेपेचाकसेबाहररक्खा
उजरत-ए-इश्क़बहुतकमथीसौहमने'शहज़ाद'
दिलकोइसतंगी-ए-अफ़्लाकसेबाहररक्खा
  - Qamar Raza Shahzad
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