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Parvez Shaikh
kuchh nahin ho sakaa vaise ab kya karoon
kuchh nahin ho sakaa vaise ab kya karoon | कुछ नहीं हो सका वैसे अब क्या करूँँ
- Parvez Shaikh
कुछ
नहीं
हो
सका
वैसे
अब
क्या
करूँँ
जीत
के
हारा
मैं
कैसे
अब
क्या
करूँँ
होना
जो
था
वहीं
हो
गया
मेरे
साथ
गिर
के
यूँँ
तो
उठा
जैसे
अब
क्या
करूँँ
- Parvez Shaikh
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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अभी
तो
जाग
रहे
हैं
चराग़
राहों
के
अभी
है
दूर
सहर
थोड़ी
दूर
साथ
चलो
Ahmad Faraz
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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इस
से
पहले
कि
बिछड़
जाएँ
हम
दो
क़दम
और
मिरे
साथ
चलो
मुझ
सा
फिर
कोई
न
आएगा
यहाँ
रोक
लो
मुझको
अगर
रोक
सको
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Nasir Kazmi
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
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Ashu Mishra
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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आपके
दर्द
की
दु'आ
की
है
मौत
से
हमने
अब
वफ़ा
की
है
Parvez Shaikh
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हिज्र-ए-मौसम
में
अपनी
सी
कर
ली
तू
ने
हद
पार
सारी
ही
कर
ली
दिल
मिरा
टूट
ज़ोर
से
ही
गया
बात
जब
उसने
ग़ैर
की
कर
ली
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Parvez Shaikh
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ये
मिरी
ज़िंदगी
किसी
की
है
फ़िक्र
मत
कीजे
आप
ही
की
है
जो
ख़फ़ा
है
उसे
मनाना
है
इस
लिए
हम
ने
शा'इरी
की
है
जिन
को
माना
था
दिल-अज़ीज़
कभी
उन्हीं
अपनों
ने
दुश्मनी
की
है
ठोकरें
लाख
खाईं
हम
ने
मगर
सिर्फ़
इक
रब
की
बंदगी
की
है
उस
हसीना
के
बिन
जिऍं
कैसे
टूट
कर
जिस
से
दिल-लगी
की
है
इश्क़
कर
के
पता
चला
हम
को
हम
ने
जीते
जी
ख़ुद-कुशी
की
है
तुम
को
परवेज़
क्या
हुआ
है
आज
इक
हसीना
से
दोस्ती
की
है
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Parvez Shaikh
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कुछ
भी
अच्छा
नहीं
हुआ
मिरे
साथ
जब
से
तू
ने
किया
गिला
मिरे
साथ
सोचता
था
कि
वो
मिरा
हैं
फ़क़त
जिस
ने
अच्छा
नहीं
किया
मिरे
साथ
उस
को
मालूम
था
ग़रीब
हूँ
मैं
इश्क़
का
ढोंग
क्यूँ
रचा
मिरे
साथ
तुम
पर
अब
प्यार
आ
रहा
है
मुझे
कुछ
तो
कर
दीजिए
बुरा
मिरे
साथ
सब
ने
परवेज़
से
नज़र
फेरी
वो
अकेला
था
जो
हँसा
मिरे
साथ
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Parvez Shaikh
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बात
इक
तरफ़ा
अच्छी
होती
नहीं
हाल
हम
सेे
भी
पूछिए
तो
कभी
Parvez Shaikh
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