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Parvez Shaikh
aapke dard ki du'a ki hai
aapke dard ki du'a ki hai | आपके दर्द की दु'आ की है
- Parvez Shaikh
आपके
दर्द
की
दु'आ
की
है
मौत
से
हमने
अब
वफ़ा
की
है
- Parvez Shaikh
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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मिरी
वफ़ा
का
तिरा
लुत्फ़
भी
जवाब
नहीं
मिरे
शबाब
की
क़ीमत
तिरा
शबाब
नहीं
Asrar Ul Haq Majaz
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चारों
तरफ़
बिखर
गईं
साँसों
की
ख़ुशबुएँ
राह-ए-वफ़ा
में
आप
जहाँ
भी
जिधर
गए
Kumar Vishwas
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आसान
नहीं
मरहला-ए-तर्क-ए-वफ़ा
भी
मुद्दत
हुई
हम
इस
को
भुलाने
में
लगे
हैं
Hafeez Banarasi
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ये
होली
ईद
कहती
है
भला
कब
अपने
हाथों
में
वफ़ा
का
रंग
होगा
प्यार
की
पिचकारियाँ
होंगी
Saleem Raza Rewa
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उसने
पूछा
था
पहले
हाल
मेरा
फिर
किया
देर
तक
मलाल
मेरा
मैं
वफ़ा
को
हुनर
समझता
था
मुझपे
भारी
पड़ा
कमाल
मेरा
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Subhan Asad
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'शाद'
ग़ैर-मुमकिन
है
शिकवा-ए-बुताँ
मुझ
से
मैं
ने
जिस
से
उल्फ़त
की
उस
को
बा-वफ़ा
पाया
Shaad Arfi
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चलो
फिर
से
मिलें
हम
अजनबी
बनकर
चलो
फिर
से
वफ़ा
की
क़स
में
हम
खाएँ
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ATUL SINGH
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डरा-धमका
के
तुम
हम
सेे
वफ़ा
करने
को
कहते
हो
कहीं
तलवार
से
भी
पाँव
का
काँटा
निकलता
है
Munawwar Rana
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इस
से
पहले
कि
बे-वफ़ा
हो
जाएँ
क्यूँँ
न
ऐ
दोस्त
हम
जुदा
हो
जाएँ
Ahmad Faraz
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मिली
ना
किसी
से
मुहब्बत
कभी
भी
पड़ी
ना
किसी
की
ज़रूरत
कभी
भी
Parvez Shaikh
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ज़िंदगी
चल
मिरा
क़ुसूर
बता
हिज्र
क्यूँ
काटना
पड़ा
मुझ
को
Parvez Shaikh
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तेरी
तस्वीर
को
सीने
से
लगा
रक्खा
है
मैंने
इक
राज़
को
ही
दिल
में
बसा
रक्खा
है
आ
ही
जाता
है
तू
हर
बार
मिरे
ख़्वाबों
में
तेरी
ही
याद
ने
दीवाना
बना
रक्खा
हैं
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Parvez Shaikh
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लाख
समझाया
पर
सुनी
ही
नहीं
ज़िद
भी
ऐसी
कि
टूटती
ही
नहीं
ज़ख़्म
इतने
मिले
हैं
दुनिया
से
अब
कोई
आरज़ू
बची
ही
नहीं
क्या
बताऊॅं
मैं
ख़ौफ़
का
आलम
ज़िंदगी
ज़िंदगी
रही
ही
नहीं
लाख
कोशिश
की
है
मगर
फिर
भी
आदत-ए-बद
कि
छूटती
ही
नहीं
वक़्त
बरहम
हुआ
है
जब
से
मेरा
क्यूँ
रफ़ाक़त
कहीं
मिली
ही
नहीं
मसअला
दिल
का
बढ़
गया
मेरा
जब
से
वो
मेरी
ज़िंदगी
ही
नहीं
ख़्वाब
में
जब
से
वो
दिखा
परवेज़
हालत-ए-दिल
में
सादगी
ही
नहीं
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Parvez Shaikh
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कुछ
भी
अच्छा
नहीं
हुआ
मिरे
साथ
जब
से
तू
ने
किया
गिला
मिरे
साथ
सोचता
था
कि
वो
मिरा
हैं
फ़क़त
जिस
ने
अच्छा
नहीं
किया
मिरे
साथ
उस
को
मालूम
था
ग़रीब
हूँ
मैं
इश्क़
का
ढोंग
क्यूँ
रचा
मिरे
साथ
तुम
पर
अब
प्यार
आ
रहा
है
मुझे
कुछ
तो
कर
दीजिए
बुरा
मिरे
साथ
सब
ने
परवेज़
से
नज़र
फेरी
वो
अकेला
था
जो
हँसा
मिरे
साथ
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Parvez Shaikh
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